नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने मृत व्यक्तियों के बैंक खातों की जानकारी उनके वारिसों को देने के मुद्दे पर केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक से जवाब मांगा है। अदालत ने कहा कि इस मामले में स्पष्ट नीति बनाना जरूरी है।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि अगर किसी व्यक्ति के अलग-अलग बैंकों में खाते हों और उसकी मृत्यु हो जाए तो उसके परिवार को उन खातों की जानकारी कैसे मिलेगी। अदालत ने यह भी कहा कि सिर्फ रकम ट्रांसफर का मुद्दा नहीं है, बल्कि वारिसों को जानकारी मिलना भी जरूरी है।
यह मामला एक जनहित याचिका के जरिए सामने आया है, जिसमें मांग की गई है कि ऐसे बैंक खातों की जानकारी देने के लिए कोई व्यवस्थित व्यवस्था बनाई जाए, जिनमें पैसे लंबे समय से बिना दावा किए पड़े हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि एक केंद्रीकृत और खोजने योग्य (सर्चेबल) डाटाबेस बनाया जाना चाहिए, जिससे लोग अपने मृत परिजनों के खातों का पता लगा सकें।
सरकार की ओर से बताया गया कि अगर कोई असली वारिस सामने आता है तो उसे जमा राशि लौटा दी जाती है। यह पैसा एक विशेष फंड में रखा जाता है, जिसमें बैंकों के बिना दावा किए गए जमा शामिल होते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक को इस मामले में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा है और अगली सुनवाई 5 मई को तय की है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि बिना दावा किए गए जमा की रकम लगातार बढ़ रही है, इसलिए एक पारदर्शी और आसान प्रणाली बनाना जरूरी है, ताकि लोगों को अपने अधिकार पाने के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया से न गुजरना पड़े। अदालत ने संकेत दिया है कि आम लोगों के हित में इस व्यवस्था को और सरल और पारदर्शी बनाने की जरूरत है।