किसी भी बच्चे के जीवन में टॉडलर चरण अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस समय बच्चे धीरे-धीरे नई चीजें सीखना शुरू करते हैं—जैसे बोलना, चलना, चित्र बनाना या खेलना। हर नई चीज सीखना बच्चे के लिए एक बड़ी सफलता होती है। लेकिन नई चीजें सीखते समय बच्चों में थोड़ी झिझक या अनिश्चितता होना भी स्वाभाविक है।
ठीक इसी समय घर का माहौल, परिवार का व्यवहार और माता-पिता का उत्साह बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि माता-पिता सकारात्मक तरीके से बच्चे को प्रोत्साहित करें, तो बच्चे का आत्म-विश्वास बढ़ता है और छोटे-छोटे सफलताओं के माध्यम से धीरे-धीरे आत्म-विश्वास का निर्माण होता है। जीवन में सफलता के बीज इसी समय बोए जाते हैं। इस समय माता-पिता को व्यवहार में विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।
कौन-कौन सी बातें ध्यान में रखें?
प्रयास करने पर प्रोत्साहित करें
बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ाने का सबसे महत्वपूर्ण तरीका है उनके प्रयास की सराहना करना। उदाहरण के लिए—अगर बच्चा ब्लॉक सजाने की कोशिश करता है, कुछ चित्र बनाता है या नया शब्द बोलने की कोशिश करता है, तो उसे प्रोत्साहित करें।
जैसे—“तुमने बहुत अच्छा प्रयास किया” जैसी बातें बच्चे के मन पर सकारात्मक प्रभाव डालती हैं। इससे वे समझते हैं कि गलती होना सामान्य है और कोशिश करना सबसे महत्वपूर्ण है।
छोटे-छोटे निर्णय लेने दें
बच्चे को आसान निर्णय लेने का मौका देने से उनका आत्मविश्वास बढ़ता है। जैसे—कौन सा कपड़ा पहनना है, कौन सा खिलौना लेकर खेलना है या सोने से पहले कौन-सी कहानी सुननी है। इस तरह छोटे निर्णय लेने से बच्चे को स्वतंत्रता का अनुभव होता है और वे महसूस करते हैं कि उनकी राय की अहमियत है।
छोटी सफलताओं का उत्सव मनाएं
टॉडलर के दैनिक जीवन में कई छोटी-छोटी सफलताएं होती हैं। जैसे—अपने जूते पहनना, नया शब्द सीखना या छोटा पजल पूरा करना। इन सफलताओं को माता-पिता की मुस्कान, तालियां या प्रशंसा के माध्यम से मनाने से बच्चे को गर्व का अनुभव होता है और वे नई चीजें सीखने के लिए प्रेरित होते हैं।
अभ्यास के लिए समय दें
नई कौशल सीखने के लिए धैर्य और बार-बार अभ्यास करना जरूरी है। कई बार किसी काम में महारत हासिल करने के लिए बच्चे को अनेकों बार प्रयास करना पड़ता है। इसलिए जल्दीबाजी न करें और बच्चे को समय दें, स्वयं प्रयास करने का अवसर दें। इससे उनका धैर्य और आत्म-विश्वास बढ़ता है।
सकारात्मक माहौल बनाएं
बच्चे के सीखने के लिए सहायक और सकारात्मक माहौल बहुत जरूरी है। यदि माता-पिता बिना आलोचना किए धैर्यपूर्वक मार्गदर्शन करें, तो बच्चे नए चीजें सीखते समय निश्चिंत रहते हैं। इससे वे बिना डर के नई चीजें आजमा सकते हैं।
अपने व्यवहार से उदाहरण पेश करें
बच्चे बहुत कुछ बड़ों को देखकर सीखते हैं। इसलिए यदि माता-पिता समस्याओं का सामना सकारात्मक दृष्टिकोण और शांत मन से करते हैं, तो बच्चे भी वही व्यवहार अपनाते हैं। इससे वे समझते हैं कि नई चीजें सीखना वास्तव में कदम दर कदम आगे बढ़ने की प्रक्रिया है।