कोलकाताः पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले नंदीग्राम सीट एक बार फिर राज्य की राजनीति का केंद्र बन गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने यहां बड़ा दांव खेलते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) के खिलाफ पबित्र कर को उम्मीदवार बनाया है-जो कभी उनके भरोसेमंद सहयोगी माने जाते थे। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब नंदीग्राम को लेकर दोनों प्रमुख दलों के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई मानी जा रही है।
स्थानीय समीकरण साधने की कोशिश
पबित्र कर (Pabitra Kar) नंदीग्राम-2 ब्लॉक के बयाल क्षेत्र के प्रभावशाली स्थानीय नेता हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह वही इलाका है जहां भाजपा की संगठनात्मक पकड़ मजबूत मानी जाती रही है। ऐसे में TMC ने उसी क्षेत्र के परिचित चेहरे को मैदान में उतारकर भाजपा के आधार वोट में सेंध लगाने की रणनीति अपनाई है।
राजनीतिक सफर: बदलते पाले, मजबूत पकड़
पबित्र कर का राजनीतिक करियर कई उतार-चढ़ाव से गुजरा है। वे पहले TMC में सक्रिय रहे और बयाल-1 ग्राम पंचायत में प्रधान और उपप्रधान जैसे पदों पर कार्य कर चुके हैं। स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक काम और जमीनी पकड़ के कारण उनकी अलग पहचान बनी। साल 2020 में उन्होंने TMC छोड़कर भाजपा का दामन थामा। दिलीप घोष (Dilip Ghosh) की मौजूदगी में उन्होंने भाजपा जॉइन की और बाद में तमलुक संगठनात्मक जिला भाजपा के उपाध्यक्ष भी बने।
2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने शुभेंदु अधिकारी के समर्थन में सक्रिय भूमिका निभाई थी। अब वही पबित्र कर उनके खिलाफ चुनावी मैदान में हैं।
TMC में वापसी और तुरंत टिकट
पबित्र कर ने हाल ही में तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) की मौजूदगी में फिर से TMC का दामन थामा। पार्टी ने बिना देर किए उन्हें नंदीग्राम से उम्मीदवार घोषित कर दिया। इसे TMC का रणनीतिक दांव माना जा रहा है, जहां पार्टी ने स्थानीय प्रभाव और अंदरूनी समीकरणों को प्राथमिकता दी है। पबित्र कर के उम्मीदवार बनने के बाद भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। स्थानीय नेता प्रलय पाल के नेतृत्व में उनके इलाके में जश्न मनाया गया और उन्हें “गद्दार” बताया गया। हालांकि TMC ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए भाजपा पर पलटवार किया और इसे राजनीतिक हताशा करार दिया।
नंदीग्राम: फिर हाई-वोल्टेज मुकाबला
नंदीग्राम पहले से ही पश्चिम बंगाल की सबसे प्रतिष्ठित सीटों में गिना जाता है। यहां का चुनाव केवल स्थानीय नहीं, बल्कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर की राजनीति का संकेत देता है। इस बार मुकाबला और रोचक हो गया है। एक ओर मजबूत संगठन और पहचान के साथ शुभेंदु अधिकारी हैं। वहीं दूसरी ओर उन्हीं के पुराने सहयोगी पबित्र कर हैं जो स्थानीय समीकरणों को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश करेंगे। TMC का यह दांव साफ संकेत देता है कि पार्टी नंदीग्राम में किसी भी तरह जीत दर्ज करना चाहती है। “इनसाइडर” उम्मीदवार उतारकर उसने भाजपा के मजबूत किले में दरार डालने की कोशिश की है। अब चुनावी मैदान में यह देखना अहम होगा कि क्या पबित्र कर अपनी स्थानीय पकड़ और पुराने नेटवर्क के सहारे शुभेंदु अधिकारी को कड़ी चुनौती दे पाते हैं, या फिर भाजपा अपनी स्थिति बरकरार रखती है।