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ममता बनर्जी ने खोले पत्ते: युवा और अनुभवी चेहरों का संतुलन, सत्ता में वापसी का दावा

टीएमसी ने जारी की 291 उम्मीदवारों की सूची। SC/ST, महिलाओं और नए चेहरों को प्रमुखता, 226+ सीटों का लक्ष्य।

By श्वेता सिंह

Mar 18, 2026 00:23 IST

कोलकाताः पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने अपनी पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतरने का संकेत दे दिया है। मुख्यमंत्री और पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने मंगलवार को 291 उम्मीदवारों की सूची जारी करते हुए साफ कर दिया कि इस बार पार्टी संगठनात्मक संतुलन, सामाजिक प्रतिनिधित्व और रणनीतिक बदलाव के सहारे चुनाव लड़ेगी।

राज्य की कुल 294 विधानसभा सीटों में से तीन सीटें दार्जिलिंग हिल्स क्षेत्र की सहयोगी पार्टी भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (बीजीपीएम) के लिए छोड़ी गई हैं। इस कदम को पहाड़ी क्षेत्रों में राजनीतिक तालमेल बनाए रखने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

संगठनात्मक मंथन के बाद तय हुए नाम

टीएमसी मुख्यालय से सूची जारी करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि उम्मीदवारों के चयन में व्यापक चर्चा, जमीनी फीडबैक और जनता की अपेक्षाओं को ध्यान में रखा गया है। उन्होंने इसे पार्टी के लिए “महत्वपूर्ण और भावनात्मक दिन” बताते हुए कहा कि चुने गए उम्मीदवार संगठन की नीतियों और जनता के विश्वास पर खरे उतरेंगे। इस दौरान पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी भी मौजूद रहे।

युवा जोश और अनुभव का संगम

टीएमसी की सूची में एक ओर जहां कई मौजूदा विधायकों को दोबारा मौका दिया गया है, वहीं दूसरी ओर नए और युवा चेहरों को भी शामिल किया गया है। यह संतुलन इस बात का संकेत है कि पार्टी न सिर्फ अपने अनुभवी नेतृत्व पर भरोसा बनाए रखना चाहती है, बल्कि नई ऊर्जा के जरिए चुनावी चुनौती का सामना करने के लिए भी तैयार है।

महिलाओं और वंचित वर्गों पर विशेष फोकस

इस बार की सूची में महिलाओं की भागीदारी खास तौर पर चर्चा में है। पार्टी ने लगभग आधी सीटों पर महिला उम्मीदवार उतारने का प्रयास किया है, जो राज्य की राजनीति में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। साथ ही अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) समुदायों को भी प्राथमिकता दी गई है। जहां राज्य में 84 सीटें इन वर्गों के लिए आरक्षित हैं, वहीं टीएमसी ने 86 से अधिक उम्मीदवार इन समुदायों से उतारे हैं। अल्पसंख्यक और अन्य हाशिए पर रहने वाले समुदायों को भी सूची में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिला है, जिससे पार्टी ने अपने पारंपरिक सामाजिक आधार को मजबूत करने का प्रयास किया है।

भवानीपुर बना हाई-प्रोफाइल रणक्षेत्र

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक बार फिर भवानिपुर सीट से चुनाव लड़ेंगी। बीजेपी ने यहां शुभेंदु अधिकारी को उतारकर मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया है। यह मुकाबला सिर्फ एक सीट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे राज्य की राजनीति में प्रतीकात्मक महत्व रखेगा। शुभेंदु अधिकारी का नंदीग्राम के साथ-साथ भवानीपुर से चुनाव लड़ना बीजेपी की आक्रामक रणनीति को दर्शाता है।

एंटी-इनकंबेंसी से निपटने की कोशिश

टीएमसी ने उम्मीदवार चयन में कई जगहों पर बदलाव कर एंटी-इनकंबेंसी को कम करने की रणनीति अपनाई है। कुछ सीटों पर नए चेहरों को मौका देकर स्थानीय असंतोष को संतुलित करने की कोशिश की गई है, जबकि मजबूत जनाधार वाले विधायकों पर भरोसा बरकरार रखा गया है।

सूची जारी करते हुए ममता बनर्जी ने बीजेपी पर “एंटी-बंगाल” राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि राज्य की जनता इसका जवाब देगी। उन्होंने भरोसा जताया कि ‘मा-माटी-मानुष’ की सरकार चौथी बार सत्ता में लौटेगी और टीएमसी 226 से अधिक सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल करेगी।

चुनाव कार्यक्रम और आगे की रणनीति

राज्य में मतदान दो चरणों में-23 अप्रैल और 29 अप्रैल 2026 को होगा, जबकि मतगणना 4 मई को होगी। उम्मीदवारों की सूची जारी होने के साथ ही अब टीएमसी अपने चुनाव प्रचार को तेज करने जा रही है। पार्टी विकास योजनाओं, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक सुरक्षा और क्षेत्रीय पहचान जैसे मुद्दों को केंद्र में रखकर अभियान चलाएगी। टीएमसी की यह उम्मीदवार सूची सिर्फ चुनावी प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत नहीं, बल्कि एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश है-पार्टी सामाजिक संतुलन, संगठनात्मक मजबूती और नेतृत्व के भरोसे चौथी बार सत्ता में वापसी के लिए पूरी तरह तैयार है।

अब नजर इस बात पर होगी कि यह रणनीति जमीन पर कितना असर डालती है और क्या ममता बनर्जी अपना 226+ सीटों का लक्ष्य हासिल कर पाती हैं।

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