कोलकाता/नई दिल्लीः भारत की आंतरिक सुरक्षा एजेंसियों ने एक अहम कार्रवाई में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय एक संदिग्ध नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अमेरिकी नागरिक और कथित ‘मर्सेनरी’ (भाड़े का सैनिक) मैथ्यू एरन वैनडाइक को कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया है। उसके साथ छह यूक्रेनी नागरिकों को दिल्ली और लखनऊ से हिरासत में लिया गया।
यह कार्रवाई 13 मार्च को शुरू हुए एक समन्वित ऑपरेशन का हिस्सा थी, जिसमें तीन प्रमुख शहरों-कोलकाता, दिल्ली और लखनऊ में एक साथ छापेमारी कर इन विदेशियों को पकड़ा गया। एजेंसी ने मंगलवार को इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए संकेत दिए कि यह मामला केवल अवैध प्रवेश तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी एक गंभीर साजिश से भी संबंधित हो सकता है।
बिना परमिट प्रवेश और सीमा पार गतिविधियां
NIA के मुताबिक, गिरफ्तार सभी विदेशी नागरिकों ने ‘रिस्ट्रिक्टेड एरिया परमिट’ (RAP) के बिना मिजोरम में प्रवेश किया था, जो कि कानूनन अनिवार्य है। इसके बाद वे कथित तौर पर म्यांमार में अवैध रूप से घुसे। जांच में सामने आया है कि म्यांमार में उनका संपर्क वहां सक्रिय सशस्त्र उग्रवादी संगठनों से हुआ। इन संगठनों के तार भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों में सक्रिय अलगाववादी और विद्रोही समूहों से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह पहलू बेहद संवेदनशील है, क्योंकि उत्तर-पूर्व लंबे समय से सीमापार नेटवर्क और उग्रवादी गतिविधियों के लिहाज से एक संवेदनशील क्षेत्र रहा है।
ड्रोन और जैमिंग तकनीक: नई चुनौती
मामले की सबसे चिंताजनक कड़ी आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से जुड़ी है। NIA की शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि आरोपी यूरोप से लाए गए अत्याधुनिक ड्रोन और जैमिंग उपकरणों के जरिए म्यांमार में ट्रेनिंग कैंप स्थापित करने की योजना बना रहे थे। सूत्रों के अनुसार, इन तकनीकों का उपयोग कर उग्रवादी समूहों को न सिर्फ निगरानी और हमले की क्षमता दी जा सकती थी, बल्कि सुरक्षा बलों की संचार प्रणाली को बाधित करने की भी कोशिश की जा सकती थी।
जांच एजेंसियां इस पहलू पर विशेष ध्यान दे रही हैं कि क्या इन तकनीकों का इस्तेमाल भारत में किसी संभावित हमले या सुरक्षा ढांचे को चुनौती देने के लिए किया जाना था।
अंतरराष्ट्रीय ‘मर्सेनरी’ नेटवर्क से जुड़ाव
मैथ्यू एरन वैनडाइक का नाम अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा हलकों में पहले से चर्चा में रहा है। वह ‘सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल’ (SOLI) नामक एक निजी लड़ाकू संगठन का संस्थापक बताया जाता है। सूत्रों के अनुसार, यह संगठन 2011 के लीबिया गृहयुद्ध में मुअम्मर गद्दाफी के खिलाफ सक्रिय रहा था। इसके अलावा इराक में ISIS के खिलाफ अभियानों और हाल के वर्षों में रूस-यूक्रेन संघर्ष के दौरान यूक्रेनी बलों को ड्रोन युद्ध की ट्रेनिंग देने से भी इसका नाम जोड़ा जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे व्यक्तियों की गतिविधियां पारंपरिक सैन्य संरचना से बाहर होती हैं, जिससे उनकी भूमिका और इरादों का आकलन करना और अधिक जटिल हो जाता है।
कानूनी कार्रवाई और आगे की जांच
गिरफ्तारी के बाद सभी सात आरोपियों को 16 मार्च को दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट स्थित विशेष NIA अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत 11 दिन की NIA हिरासत में भेज दिया है। NIA अब इस नेटवर्क की पूरी परतें खंगाल रही है-जिसमें फंडिंग, अंतरराष्ट्रीय संपर्क, तकनीकी संसाधन और संभावित स्थानीय सहयोगियों की पहचान शामिल है। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि क्या यह मामला किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का हिस्सा है, जो दक्षिण एशिया में अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए अलर्ट
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब भारत में ड्रोन और हाई-टेक उपकरणों के दुरुपयोग को लेकर पहले से ही सतर्कता बढ़ाई गई है। इस गिरफ्तारी ने यह संकेत दिया है कि भविष्य के खतरे पारंपरिक तरीकों के बजाय तकनीक आधारित और अधिक जटिल हो सकते हैं।