नई दिल्ली : कई महीनों से उनके काम पर निगरानी रखी जा रही थी यह वे बिल्कुल समझ नहीं पाए। अगर समझ पाते तो शायद सतर्क हो जाते लेकिन अंत तक उन्हें वह मौका नहीं मिला। एक दिन अपने केबिन में बैठने के कुछ ही देर बाद उन्हें वरिष्ठ अधिकारी के कमरे में बुलावा आया। उन्हें बताया गया कि कई महीनों से उन्होंने ‘काम का काम’ कुछ नहीं किया है। इसलिए उनके लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति पर विचार किया गया है। साथ ही उन्हें यह भी बताया गया कि इंडियन रेलवे एस्टैब्लिशमेंट कोड (आईआरईसी) के वॉल्यूम 2 के नियम 1802(क) के अनुसार यह निर्णय लिया गया है। इस कानून के तहत भारतीय रेल के नॉर्दर्न ज़ोन, साउथ वेस्टर्न ज़ोन, साउथ-ईस्ट सेंट्रल ज़ोन और ईस्टर्न ज़ोन से एक-एक तथा रेलवे बोर्ड सेक्रेटेरियट सर्विस से दो वरिष्ठ अधिकारियों कुल मिलाकर छह लोगों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के लिए बाध्य किया गया है।
रेल की ओर से बताया गया है कि कार्यस्थल पर आकर कर्तव्य में लापरवाही जैसे मामलों को किसी भी तरह बर्दाश्त न करने का निर्देश सीधे रेलवे बोर्ड के अधिकारियों से आया है। इसलिए हर ज़ोन के प्रत्येक डिवीजन के कर्मचारियों पर नजर रखी जा रही है। रेल अधिकारियों ने बताया कि उक्त 1802(क) नियम प्रशासन को जनहित में किसी अधिकारी को सेवानिवृत्त करने की शक्ति देता है। इस तरह के कदम के जरिए कर्मचारियों को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि संस्था के किसी भी स्तर पर अयोग्यता या काम में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही कर्मचारियों को यह भी बता दिया गया है कि सेवा के मानकों को पूरा करने में विफल रहने वालों के खिलाफ ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई जाएगी, यानी उन्हें बिल्कुल भी रियायत नहीं दी जाएगी।
कार्यस्थल पर काम में लापरवाही के साथ-साथ भारतीय रेल के हर ज़ोन में ऐसे कई कर्मचारी भी हैं जो कार्यालय में बेहद अनियमित हैं। ऐसे कर्मचारियों की भी पहचान करने का काम चल रहा है यह रेल अधिकारियों ने बताया। जानकारी मिली है कि हर कर्मचारी के नाम से अलग-अलग फाइल बनाई गई है जिसमें उनके काम की जिम्मेदारियां और वे रोज कितना काम कर रहे हैं इसका पूरा विवरण दर्ज किया जा रहा है।