🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

युद्ध में ‘महंगा’ होगा एमआरआई? कतर में गैस केंद्र पर हमले से टेन लिक्विड हीलियम की आपूर्ति प्रभावित

कहावत है कि राजा-राजा में युद्ध होता है, और असहाय व्यक्ति अपनी जान गंवा देता है।

नई दिल्ली : कहते हैं कि राजा के साथ राजा का युद्ध होता है और असहाय या कमजोर लोग युद्ध में जान गंवा देते है। कहां 2 हजार 800 किलोमीटर दूर ईरान में मिसाइल दागने का खेल चल रहा है, और कहां कोलकाता (भारत) में इलाज के लिए जरूरी एमआरआई (MRI) के बिल में लगातार बढ़ोत्तरी की संभावना है!

संपर्क सूत्र खोजने के लिए भारी मशक्कत करने की जरूरत नहीं। कम्पाउंड टोमोग्राफी (सीटी) स्कैन से अधिक सटीक चित्र लेने के लिए जो मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) अब व्यापक रूप से प्रचलित है, उसमें मुख्य काम मैग्नेटिक और इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक फील्ड के माध्यम से होता है।

जिस हिस्से में एमआरआई किया जा रहा है, वहां विभिन्न स्तरों पर मौजूद हाइड्रोजन परमाणुओं का पता लगाकर संभव हो तो उसका त्रि-आयामी (3D) चित्र तैयार किया जाता है। मशीन में मौजूद सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट्स को तेजी से आवश्यक स्तर (-269 डिग्री सेल्सियस) पर ठंडा करने का एकमात्र हथियार है लिक्विड हीलियम।

पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण भारत में इसकी नियमित आपूर्ति पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। एक स्टैंडर्ड एमआरआई मशीन में लगभग 1,700–1,800 लीटर लिक्विड हीलियम की जरूरत होती है।

मेडिकल टेक्नोलॉजी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन पवन चौधरी Pawan Choudhary का दावा है कि देश में अब 15–20 दिनों के लिए लिक्विड हीलियम का 'स्टॉक' मौजूद है। अगर युद्ध की स्थिति नहीं सुधरी, तो एमआरआई के बिल में और बढ़ोतरी होना आश्चर्यजनक नहीं होगा।

यह हीलियम लिक्विड नेचुरल गैस (LNG) प्रोसेसिंग के दौरान प्राप्त होता है। लेकिन इस सप्ताह ईरान के साउथ पर्स नेचुरल गैस फील्ड और कतर के 'रास लाफान' में विस्फोट के कारण भारत में भविष्य में आवश्यक LNG कितनी पहुंचेगी या पहुँच पाएगी, इस पर बड़ा सवाल उठ गया है।

ये दोनों गैस उत्पादन केंद्र विश्व के 20% लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की आपूर्ति करते हैं। अगर यह सप्लाई चैन बाधित होती है, तो विश्व बाजार में गैस की आपूर्ति संकटग्रस्त होने के साथ ही इसकी कीमत काफी बढ़ सकती है।

हालांकि यह पहली बार नहीं है। युद्ध शुरू होते ही दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस आपूर्तिकर्ता कंपनी कतरएनर्जी के प्लांट पर ईरान से मिसाइल दागी गई थी, जिसके बाद कारखाना बंद हो गया।

परिणामस्वरूप विश्वभर में दैनिक गैस आपूर्ति में बड़ा झटका आने वाला है, ऐसा बाजार विशेषज्ञों का दावा है। केंद्रीय तेल मंत्रालय की संयुक्त सचिव Sujata Sharma ने शुक्रवार को पत्रकारों को बताया कि नई दिल्ली के पास वर्तमान में जो जानकारी है, उसके अनुसार और कोई हमला न भी हुआ हो, तब भी कतर के दो सबसे बड़े गैस निर्यातक कंपनी 'रास लाफान' और कतरएनर्जी के प्लांटों को हुए नुकसान के कारण अगले 3–5 वर्षों में उत्पादन पूरी तरह से शुरू नहीं हो पाएगा। यह भारत के लिए बड़ा झटका है।

वर्तमान स्थिति में तेल की तुलना में गैस के मामले में भारत का खतरा 'अधिक' है, ऐसा बाजार विशेषज्ञों का दावा है। क्योंकि देश की वार्षिक मांग का 50% गैस भारत को आयात करनी पड़ती है। इसका बड़ा हिस्सा कतर से आता है। अगर यह आपूर्ति बंद हो गई, तो रूस से तेल खरीदने जैसे आसान विकल्प केंद्र सरकार के पास इस समय उपलब्ध नहीं हैं। विशेषकर तब, जब दैनिक आयात का लगभग 50% पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद बंद हो गया है। अब कतर में तेहरान के हमले के कारण स्थिति और बिगड़ने वाली है।

लेकिन केवल एमआरआई मशीन के लिए ही नहीं, इस युद्ध के कारण देश के चिकित्सा क्षेत्र में हॉस्पिटल कंज्यूमेबल्स (जैसे IV बैग/लाइन, यूरिन बैग, कैनुला, सिरिंज) की भी कमी पड़ सकती है, ऐसा बाजार विशेषज्ञों का कहना है।

बाजार विशेषज्ञों का दावा है कि हीलियम फ्री 'सील्ड मैग्नेट टेक्नोलॉजी' में अब देश के कुछ जगहों पर एमआरआई किया जाता है, लेकिन वह अत्यंत कम और महंगा है। दुनिया की दैनिक आपूर्ति का 25–30% लिक्विड हीलियम ही पारंपरिक एमआरआई मशीन के लिए जाता है।

सेमीकंडक्टर उद्योग में इसका 20–25% उपयोग होता है। हाल के आंकड़े बताते हैं कि युद्ध के कारण उद्योग में लिक्विड हीलियम की जो कमी हुई है, उसके कारण स्पॉट प्राइस पहले ही दोगुना हो गया है। साथ ही दैनिक आपूर्ति लगभग 42–45% कम हो गई है। यह केवल लिक्विड हीलियम ही नहीं, बल्कि दुनिया में सेमीकंडक्टर चिप और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक के लिए भी 'सुखद खबर' नहीं है।

रास लाफान में ईरानी हमले की खबर सामने आते ही यूरोप में गैस की कीमत एक ही झटके में 35% बढ़ गई। आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और रूस के साथ दुनिया के शीर्ष LNG उत्पादक देशों की सूची में कतर पहले पांच में शामिल है।

उनके गैस केंद्रों में इस विस्फोट से हुए नुकसान को देखते हुए विशेषज्ञ संगठन वुड मैकेंजी का दावा है कि युद्ध तुरंत रुक भी जाए और हर्मुज के रास्ते कंटेनर का संचालन सामान्य हो जाए, तब भी कतर की कंपनियों को उत्पादन युद्ध से पहले के स्तर तक ले जाने में पांच साल लगेंगे। अब भारत के लिए यह देखना महत्वपूर्ण है कि वह इसका विकल्प कैसे ढूंढता है।

Articles you may like: