नई दिल्ली : यात्री सुरक्षा और खाने की गुणवत्ता सुधारने के लिए बड़ा कदम उठाया है भारतीय रेल ने। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि रेलवे नेटवर्क में QR-कोड युक्त पहचान पत्र और डिजिटल रूप से ट्रैक किए जा सकने वाले खाने के पैकेट शुरू किए गए हैं।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य अवैध हॉकर्स को रोकना और यात्रियों तक सुरक्षित व उच्च गुणवत्ता वाला भोजन पहुंचाना है।
नए नियम के अनुसार रेलवे में काम करने वाले सभी कर्मचारी, सहायक और लाइसेंस प्राप्त विक्रेताओं को QR-कोड युक्त आईडी कार्ड रखना होगा। यह कार्ड सिर्फ पहचान पत्र नहीं है। इसमें विक्रेता की विस्तृत जानकारी होगी। यात्री QR कोड स्कैन करते ही विक्रेता का नाम, आधार नंबर, स्वास्थ्य परीक्षण की जानकारी और पुलिस सत्यापन की स्थिति जान सकेंगे। इससे फर्जी विक्रेताओं की एंट्री बंद होने की उम्मीद है।
खाने के मामले में भी बड़ा बदलाव किया गया है। अब हर खाने के पैकेट पर QR कोड होगा। इस कोड को स्कैन करने पर पता चलेगा कि खाना कहाँ बना है और कब बनाया गया है। इससे खाने की गुणवत्ता और ताजगी को लेकर पारदर्शिता बढ़ेगी। किसी समस्या होने पर रेलवे तुरंत स्रोत की पहचान कर सकेगा।
रेल मंत्रालय की ओर से बताया गया है कि रेल यात्रियों के लिए जिन रसोईघरों में खाना तैयार किया जा रहा है वहां CCTV निगरानी रखी गई है ताकि स्वास्थ्य मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, यह सुनिश्चित किया जा सके। केवल अनुमोदित और ब्रांडेड सामग्री के उपयोग का निर्देश दिया गया है। साथ ही हर रसोईघर में फूड सेफ्टी सुपरवाइजर नियुक्त किया गया है।
रेलवे की ओर से यह भी बताया गया है कि तीसरे पक्ष के माध्यम से नियमित ऑडिट किया जा रहा है। इसके अलावा FSSAI प्रमाणन अब अनिवार्य कर दिया गया है। यात्रियों की प्रतिक्रिया लेने और कर्मचारियों के प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की गई है। इससे सेवा की गुणवत्ता और बेहतर होने की उम्मीद है।