मुंबई : HDFC Bank में हलचल और बढ़ गई है। चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे के दो दिन के भीतर ही तीन शीर्ष अधिकारियों को पद छोड़ने का निर्देश दिया गया है, ऐसा बताया गया है। हालांकि उन तीन अधिकारियों के नाम अभी तक सामने नहीं आए हैं। लेकिन खबरों के मुताबिक एक बिजनेस डिविजन के प्रमुख, एक एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और एक सीनियर वाइस प्रेसिडेंट को पद छोड़ने के लिए कहा गया है।
इस संबंध में मीडिया के सवालों के जवाब में बैंक की ओर से बताया गया कि संयुक्त अरब अमीरात के डीआईएफसी (DIFC) शाखा में ग्राहक ऑनबोर्डिंग से जुड़ी कुछ त्रुटियां पाई गई थीं। उस मामले की विस्तृत समीक्षा की गई है।
बैंक का कहना है कि हमारी आंतरिक नीतियों के आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं। साथ ही कर्मचारियों के संबंध में भी उचित कार्रवाई की गई है, जो बैंक की आचार संहिता के अनुरूप है। बैंक ने यह भी कहा कि उनकी एक सुदृढ़ शासन व्यवस्था है और वे हमेशा नियमों का पालन और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
इस फैसले के पीछे क्रेडिट सुइस के अतिरिक्त टियर-1 (AT-1) बॉन्ड की बिक्री से जुड़ा विवाद कारण माना जा रहा है। आरोप है कि दुबई शाखा से इन बॉन्ड्स को एनआरआई ग्राहकों को एक निश्चित अवधि के सुरक्षित निवेश के रूप में बेचा गया था। फाइनेंशियल सर्विस कंपनी क्रेडिट सुइस के दिवालिया होने के बाद इन बॉन्ड्स को पूरी तरह लिख दिया गया। बाद में UBS ने क्रेडिट सुइस का अधिग्रहण कर लिया।
इस घटना का चेयरमैन के इस्तीफे से कोई संबंध है या नहीं, इस पर सवाल उठ रहे हैं। इस बारे में बैंक के एमडी और सीईओ शशिधर जगदीशन ने कहा कि इस तरह की घटनाएं नई नहीं हैं। पिछले 32 वर्षों में ऐसी कई बातें सामने आई हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि हर मामले को जवाबदेही के आधार पर देखा जाता है। हमारी निर्धारित नीतियां और प्रक्रियाएं हैं। उसी के अनुसार निर्णय लिए जाते हैं। यह जरूरी नहीं कि हर कोई उन फैसलों से सहमत हो। मतभेद हो सकते हैं, और यही अच्छी शासन व्यवस्था की पहचान है। उनके अनुसार इसी कारण अतनु चक्रवर्ती का इस्तीफा हो सकता है।