राजस्थान में बाल्य विवाह के एक मामले में अदालत ने एक बड़ा फ़ैसला सुनाया है। अदालत ने एक ऐसी महिला की शादी को रद्द कर दिया है जिसका रिश्ता उसके घरवालों ने बचपन में ही तय कर दिया था। बाद में ससुराल वाले जब उसे ले जाने के लिए दबाव डालने लगे तो वह अदालत में चली गई। इसके बाद एक पारिवारिक अदालत ने मामले की सुनवाई की और उसकी 9 साल पहले हुई शादी को निरस्त कर दिया।
12 साल की उम्र में ही कर दी थी शादी
यह मामला जोधपुर जिले के एक ग्रामीण इलाके का है। वहां की एक 21 साल की महिला ने पारिवारिक कोर्ट में फरियाद की। उसने बताया कि सामाजिक दबाव के कारण उसकी शादी 2016 में जोधपुर जिले के एक ग्रामीण इलाके में कर दी गई थी। कुछ साल बाद उसके ससुराल वालों ने ‘गौना' के लिए दबाव डालना शुरू किया जब शादी के बाद विवाहिता स्त्री को पहली बार अपने पति के घर जाना होता है और वास्तविक वैवाहिक जीवन की शुरुआत करनी होती है। महिला ने कहा कि इसकी वजह से उसे कथित रूप से मानसिक परेशानी होने लगी।
इसके बाद लगभग 18 महीने पहले उसने विवाह रद्द करने के लिए अदालत में याचिका दायर की। उसने पारिवारिक अदालत में एक याचिका दायर कर विवाह की वैधता को चुनौती दी। उसने बताया कि उसकी शादी बिना उसकी सहमति के कर दी गई थी जब वह केवल 12 वर्ष की थी। कार्यवाही के दौरान, याचिकाकर्ता ने आयु संबंधी दस्तावेज और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए जो इस दावे का समर्थन करते थे कि विवाह के समय वह नाबालिग थी।
पति भी था नाबालिग
याचिका में यह भी दलील दी गई कि जिस व्यक्ति से उसका विवाह हुआ था, उसकी उम्र भी 21 वर्ष नहीं थी जो कि गैरकानूनी है। हालांकि, प्रतिवादी ने दलील दी कि विवाह बाद में तब हुआ था जब दोनों पक्ष वयस्क हो गए थे। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, पीठासीन अधिकारी वरुण तलवार ने याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया और विवाह को रद्द कर दिया।
अदालत ने अपने आदेश में बाल्य विवाह के कारण बच्चों के वर्तमान और भविष्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को ध्यान में रखते हुए इस प्रथा को समाप्त करने के लिए सामाजिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। जोधपुर की एक पारिवारिक अदालत ने गुरुवार को आदेश पारित कर 21 वर्षीय महिला के विवाह को रद्द कर दिया। महिला की शादी 12 साल की उम्र में कर दी गई थी।