तेहरानः ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध ने एक नया और खतरनाक मोड़ ले लिया है। शुक्रवार को इजरायल ने तेहरान पर हवाई हमले किए, ठीक उस समय जब ईरान में लोग नवरोज, यानी फारसी नववर्ष मना रहे थे। इन हमलों ने न केवल क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर भी गहरा असर डाला है।
प्रत्यक्षदर्शियों और एक्टिविस्ट्स के अनुसार, राजधानी तेहरान के आसपास कई विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। यह हमला ऐसे समय हुआ जब एक दिन पहले ही इजरायल ने ईरान के एक प्रमुख गैस फील्ड पर आगे हमले रोकने की बात कही थी, जबकि ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में तेल और गैस प्रतिष्ठानों पर अपने हमले तेज कर दिए थे।
इस बीच दुबई में भी शुक्रवार तड़के जोरदार धमाके सुनाई दिए, जहां एयर डिफेंस सिस्टम ने आने वाले हमलों को हवा में ही रोक दिया। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, शहर में उस समय ईद-उल-फितर की नमाज की तैयारियां चल रही थीं। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई जारी रखी है। उत्तरी इजरायल के कई हिस्सों-हाइफा, गैलीली और लेबनान सीमा तक-सायरन बजते रहे और लोगों को शेल्टर में जाना पड़ा। इजरायली सेना के अनुसार, गुरुवार को ही एक दर्जन से अधिक मिसाइलें दागी गई थीं।
ऊर्जा आपूर्ति पर इस युद्ध का सबसे बड़ा असर देखा जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल गुजरता है, ईरान के नियंत्रण में है। इस कारण वैश्विक ईंधन आपूर्ति पर भारी दबाव बन गया है। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का दाम 119 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जो युद्ध शुरू होने के बाद 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है। यूरोप में प्राकृतिक गैस की कीमतें भी लगभग दोगुनी हो चुकी हैं।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुरोध पर ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर आगे हमले फिलहाल रोक दिए जाएंगे। हालांकि ईरान के जवाबी हमलों ने पहले से ही ऊंची ऊर्जा कीमतों को और बढ़ा दिया है, जिससे खाड़ी देशों में चिंता बढ़ गई है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी इस बढ़ते संकट पर आपात बैठक की। खाड़ी देशों ने ईरान से हमले रोकने की अपील की, लेकिन जमीनी हालात इसके विपरीत नजर आ रहे हैं। सऊदी अरब के यनबू स्थित रिफाइनरी, कतर के रास लाफान गैस प्लांट, कुवैत और अबू धाबी की ऊर्जा परियोजनाएं भी हमलों की चपेट में आई हैं।
कतर ने बताया कि उसके रास लाफान एलएनजी प्लांट को हुए नुकसान से उसके गैस निर्यात में करीब 17 प्रतिशत की कमी आई है और हर साल लगभग 20 अरब डॉलर का नुकसान होगा। इस क्षति को पूरी तरह ठीक करने में पांच साल तक लग सकते हैं।
इस बीच समुद्री सुरक्षा भी गंभीर चिंता का विषय बन गई है। संयुक्त अरब अमीरात के तट के पास एक जहाज में आग लग गई, जबकि कतर के पास एक अन्य जहाज को नुकसान पहुंचा। यहां तक कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किए जा रहे रास्ते भी सुरक्षित नहीं रह गए हैं।
नेतन्याहू ने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचा है और उसकी वायुसेना व नौसेना लगभग निष्क्रिय हो चुकी है, हालांकि इसके समर्थन में उन्होंने कोई ठोस सबूत नहीं दिया। इसके बावजूद ईरान अब भी मिसाइल और ड्रोन हमले करने में सक्षम है।
अमेरिका ने इस युद्ध में अपनी भूमिका को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कहा है कि अमेरिका ईरान में जमीनी सैनिक नहीं भेजेगा। हालांकि अमेरिकी सेना हवाई हमलों में शामिल है और ईरान के भीतर गहरे ठिकानों को निशाना बना रही है।
24 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध में अब तक भारी जनहानि हो चुकी है। ईरान में 1300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि इजरायल में 15 लोगों की जान गई है। लेबनान में हिज्बुल्लाह से जुड़े संघर्ष में 1000 से ज्यादा लोग मारे गए और 10 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं। इसके अलावा 13 अमेरिकी सैनिकों की भी मौत की पुष्टि हुई है।
कुल मिलाकर, यह युद्ध अब सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया और वैश्विक अर्थव्यवस्था को अपनी चपेट में लेता जा रहा है। आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं, क्योंकि कूटनीतिक प्रयास फिलहाल असरदार साबित नहीं हो रहे हैं।