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क्या है 'गैस एटीएम'? LPG की आपूर्ति प्रभावित होने के बाद गुरुग्राम में शुरू हुई नई पहल

अगर कोई उपभोक्ता अपना खाली सिलेंडर लेकर यहां आता है तो वह भरा हुआ सिलेंडर लेकर घर जा सकता है।

By Moumita Bhattacharya

Mar 20, 2026 01:28 IST

पश्चिम एशियाई युद्ध के मद्देनजर भारत में रसोई गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। इस समस्या के समाधान के लिए गुरुग्राम के निवासियों के लिए एक अनोखी पहल शुरू की गयी है। इस पहल की शुरुआत भारत पेट्रोलियम की ओर से की गयी है। इस पहल के तहत LPG वेंडिंग मशीन लगायी गयी है जिसे आम बोलचाल की भाषा में 'गैस एटीएम' कहा जा रहा है। पर क्या है 'गैस एटीएम'? कैसे काम करता है यह?

दिल्ली NCR में इसे पायलट परियोजना के तहत शुरू किया गया है जो मौजूदा अस्थिरता के बीच ईंधन की आपूर्ति को सुगम बनाने की कोशिश कर रहा है।

क्या है 'गैस एटीएम'?

'गैस एटीएम' को गुरुग्राम के सोहना सेक्टर 33 में सेंट्रल पार्क फ्लावर वैली में बनाया गया है। आप सोच रहे होंगे कि आखिर यह ATM काम कैसे करता होगा? दरअसल यह एक ऑटोमेटिक सुविधा है जो स्वैप के सिद्धांत पर काम करती है। इसका मतलब है कि अगर कोई उपभोक्ता अपना खाली सिलेंडर लेकर यहां आता है तो वह भरा हुआ सिलेंडर लेकर घर जा सकता है। इस एटीएम में एक कॉन्टैक्टलेस इंटरफेस बनाया गया है जो तेजी से और कुछ ही पलों में भरा हुआ सिलेंडर उपलब्ध करवाने में सक्षम है।

कैसे उठा सकेंगे लाभ?

गैस एटीएम का लाभ उठाने के लिए उपभोक्ताओं को इस एटीएम में अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर दर्ज करवाना होगा। ऐसा करने पर मोबाइल में एक OTP आएगा, जिसे वेरिफाई करना पड़ेगा। इसके QR कोड को स्कैन कर UPI अथवा डेबिट कार्ड के माध्यम से सिलेंडर की कीमत का भुगतान करने पर मशीन से भरा हुआ सिलेंडर जारी कर दिया जाएगा।

First Post की मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार मशीन से जो सिलेंडर जारी किए जाएंगे वह पोर्टेबल होने के साथ-साथ पारदर्शी बॉडी वाले भी होते हैं। इसका मतलब है कि उपभोक्ता आसानी से घर पर गैस के स्तर की जांच कर सकेगा जिससे गैस के खत्म होने से पहले ही इस बारे में जानकारी मिल सकेगी।

बताया जाता है कि आम जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने सिलेंडर वेंडिंग मशीन को 24 घंटे संचालित रखने का फैसला लिया है। एक उपभोक्ता द्वारा इस मशीन से अपना सिलेंडर भरने के 10 मिनट बाद दूसरा सिलेंडर रखा जा सकेगा। जब मशीन में सिलेंडर का स्टॉक महज 2 रह जाएगा तब यह मशीन खुद-ब-खुद अपने स्थानीय एजेंसी को एक अलर्ट भेज देगी। इससे एजेंसी इसे तुरंत रिस्टॉक कर सकेगी।

गौरतलब है कि भारत रसोई गैस की खपत का लगभग 60% आयात पर निर्भर है। इसलिए समुद्री मार्गों में किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर घरेलू आपूर्ति पर पड़ता है। वर्तमान में होर्मूज जलसंधि के बंद होने से ईंधन की आपूर्ति पर इसका असर पड़ा है।

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