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राज्यसभा के 59 सदस्यों को सम्मानजनक विदाई, पीएम ने उनके योगदान और अनुभव को बताया देश की अमूल्य पूंजी

संसद के उच्च सदन में 20 राज्यों के 59 सांसदों का कार्यकाल समाप्त, वरिष्ठ नेताओं की भूमिका को किया गया याद

By डॉ. अभिज्ञात

Mar 19, 2026 14:41 IST

नई दिल्लीः नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष समारोह में राज्यसभा के उन 59 सदस्यों को सम्मानपूर्वक विदाई दी गई, जिनका कार्यकाल अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच समाप्त हो रहा है। ये सदस्य देश के 20 राज्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं। कार्यक्रम 18 मार्च को उपराष्ट्रपति एन्क्लेव में आयोजित किया गया, जिसमें कई वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति रही।

विदा होने वाले सदस्यों में पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा, शरद पवार, रामदास अठावले और उपसभापति हरिवंश जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। इनमें नौ महिला सांसद भी थीं। उल्लेखनीय है कि शरद पवार और रामदास अठावले दोबारा राज्यसभा के लिए चुने जा चुके हैं।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे कार्यक्रम राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर एक साझा भाव पैदा करते हैं। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में अनुभव कभी व्यर्थ नहीं जाता और यह देश की पूंजी बनकर रहता है, चाहे कोई नेता संसद में रहे या समाज सेवा के अन्य क्षेत्रों में सक्रिय हो।

प्रधानमंत्री ने वरिष्ठ नेताओं के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि नई पीढ़ी के सांसदों को उनसे सीख लेनी चाहिए। उन्होंने हरिवंश के शांत स्वभाव और कठिन परिस्थितियों में सदन को संतुलित ढंग से चलाने की क्षमता की भी सराहना की।

राज्यसभा की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद की द्विसदनीय व्यवस्था में “दूसरी राय” का विशेष महत्व है, जो कानून निर्माण प्रक्रिया को और अधिक संतुलित और प्रभावी बनाती है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सेवानिवृत्त हो रहे कई सदस्य पुराने और नए संसद भवन—दोनों का हिस्सा रहे हैं, जो उनके सार्वजनिक जीवन की एक महत्वपूर्ण स्मृति है। मोदी ने राज्यसभा को एक “खुला विश्वविद्यालय” बताते हुए कहा कि यहां बिताए गए वर्षों से व्यक्ति के दृष्टिकोण और अनुभव में व्यापक विस्तार होता है।

समारोह में राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी सदस्यों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि हर दो साल में होने वाला यह परिवर्तन लोकतंत्र में निरंतरता और नये विचारों के संतुलन को दर्शाता है। कार्यक्रम के अंत में विदा हो रहे सदस्यों को स्मृति-चिह्न भेंट किए गए और उनके सम्मान में सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी आयोजित की गईं, जिनमें लोक नृत्य और संगीत कार्यक्रम शामिल थे।

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