विटामिन B12 का मुख्य स्रोत आमतौर पर पशु-आधारित खाद्य पदार्थ होते हैं इसलिए जो लोग शाकाहारी होते हैं, वे अक्सर इस विटामिन की कमी से जूझते हैं। शरीर में इसकी कमी होने पर कई समस्याएं हो सकती हैं।
विटामिन B12 इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
विटामिन B12 शरीर के लिए एक अत्यंत आवश्यक पोषक तत्व है। यह लाल रक्त कणिकाओं (RBC) के निर्माण, नसों के सही कार्य और मस्तिष्क को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है। इसके अलावा DNA के निर्माण में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
शरीर में B12 की कमी होने पर क्या होता है?
जब शरीर में विटामिन B12 कम हो जाता है, तो शुरुआत में थकान, कमजोरी, चक्कर आना या मूड खराब रहने जैसी समस्याएं हो सकती हैं लेकिन लंबे समय तक कमी रहने पर यह गंभीर रूप ले सकती है, जैसे— एनीमिया, हाथ-पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन, याददाश्त कमजोर होना, चलने-फिरने में दिक्कत और यहां तक कि नसों को स्थायी नुकसान भी हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर खुद से विटामिन B12 नहीं बना सकता इसलिए इसे भोजन के माध्यम से लेना जरूरी है। शाकाहारियों के लिए यह और भी जरूरी हो जाता है क्योंकि उनके आहार में इसके प्राकृतिक स्रोत सीमित होते हैं।
डाइट में कौन-कौन से खाद्य पदार्थ शामिल करें?
दूध, दही, पनीर, फोर्टिफाइड सीरियल और फोर्टिफाइड प्लांट-बेस्ड दूध। शाकाहारी होने के बावजूद ये सभी विटामिन B12 के अच्छे स्रोत हैं।
दूध
एक गिलास गाय के दूध में लगभग 1.1 माइक्रोग्राम विटामिन B12 होता है, जो वयस्कों की दैनिक जरूरत (2.4 माइक्रोग्राम) का लगभग 45% पूरा करता है। भारतीय घरों में रोजाना चाय, मिल्कशेक या गर्म दूध के रूप में लिया जाता है इसलिए यह B12 बढ़ाने का आसान तरीका है। शोध में पाया गया है कि दूध में मौजूद B12 शरीर आसानी से अवशोषित कर लेता है। हल्दी मिलाकर पीने से इसके एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण बढ़ जाते हैं।
दही
लो-फैट एक कटोरी दही में 0.6–1.0 माइक्रोग्राम B12 होता है। इसमें मौजूद लाइव कल्चर आंतों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं और विटामिन B12 के अवशोषण में मदद करते हैं। भारतीय भोजन में दही एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो पाचन में सहायक होता है और B12 की कमी के लक्षण जैसे मुंह के छाले या कब्ज को कम करने में मदद करता है। फर्मेंटेशन प्रक्रिया के दौरान बैक्टीरिया थोड़ी मात्रा में B12 बनाते हैं इसलिए घर का बना दही कई बार बाजार के दही से अधिक लाभकारी होता है। नियमित दही खाने से शाकाहारियों में B12 का स्तर बढ़ सकता है। इसमें मौजूद प्रोबायोटिक्स शरीर की सूजन कम करते हैं और नसों की झुनझुनी को कम करने में मदद करते हैं।
पनीर
100 ग्राम घर के बने पनीर में लगभग 0.7–0.8 माइक्रोग्राम विटामिन B12 होता है, जो दैनिक जरूरत का लगभग एक-तिहाई पूरा करता है। इसके अलावा इसमें 18–20 ग्राम प्रोटीन भी होता है। लैक्टो-वेगिटेरियन लोगों के लिए यह बहुत उपयोगी है क्योंकि यह B12 की कमी को पूरा करने और मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करता है। शोध में पाया गया है कि पनीर की संरचना पकाने के दौरान भी विटामिन B12 को बनाए रखने में मदद करती है, जो अन्य प्रोसेस्ड चीज में नहीं होता इसलिए कम वसा वाला पनीर चुनना बेहतर है लेकिन सप्ताह में 3–4 बार ही पर्याप्त है।