कोलकाता/उत्तर बंगाल: तृणमूल कांग्रेस (TMC) की उम्मीदवार सूची जारी होने के 24 घंटे के भीतर ही पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। उत्तर बंगाल के कई जिलों में टिकट से वंचित नेताओं और उनके समर्थकों के विरोध-प्रदर्शन जारी हैं, जिससे संगठन के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।
राजनीतिक हलकों में इस बात पर चर्चा शुरू हो गयी है कि पार्टी के कुछ नाराज नेता आगे क्या कदम उठा सकते हैं। कहीं वे दूसरे दलों का दामन तो नहीं थाम लेंगे। खास तौर पर राजगंज, इस्लामपुर और अलीपुरद्वार सीटों पर स्थिति ज्यादा संवेदनशील मानी जा रही है।
राजगंज में खगेश्वर राय का अल्टीमेटम
राजगंज के निवर्तमान विधायक खगेश्वर राय ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा है कि यदि इस अवधि के भीतर उम्मीदवार बदलकर उनका नाम घोषित नहीं किया गया, तो वे “वैकल्पिक रास्ता” अपनाने पर विचार करेंगे। खगेश्वर राय ने अपने साथ अन्याय होने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी उन्हें पहले ही बता सकती थी कि उन्हें टिकट नहीं दिया जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वे इस फैसले के पीछे के कारणों से परिचित हैं और जल्द ही अपना अंतिम निर्णय सार्वजनिक करेंगे।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, वरिष्ठ नेताओं ने उनसे संपर्क कर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है, लेकिन वे इससे संतुष्ट नहीं दिख रहे हैं। उनका फोन बंद होना और सार्वजनिक बयान न देना राजनीतिक अटकलों को और हवा दे रहा है। हालांकि, पार्टी के कुछ नेता इस मुद्दे को ज्यादा महत्व नहीं दे रहे हैं। जलपाईगुड़ी सीट से उम्मीदवार कृष्ण दास ने कहा कि खगेश्वर राय चुनाव जीतने की स्थिति में नहीं थे और उनके टिकट न मिलने से कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। इस बीच, भाजपा नेताओं ने दावा किया है कि इस स्थिति का फायदा उन्हें चुनाव में मिलेगा और वे राजगंज व जलपाईगुड़ी दोनों सीटों पर जीत हासिल करेंगे।
इस्लामपुर में करीम चौधरी को लेकर सियासत
इस्लामपुर विधानसभा सीट पर टिकट बदलने के फैसले के बाद तृणमूल के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अब्दुल करीम चौधरी के समर्थकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लगभग पांच दशकों से क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय करीम चौधरी को टिकट न मिलने पर उनके समर्थकों ने विरोध जताया और इसे अन्यायपूर्ण करार दिया।
इस घटनाक्रम के बीच कांग्रेस ने भी सक्रियता दिखाई है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने संकेत दिया है कि यदि करीम चौधरी तृणमूल छोड़ते हैं, तो उन्हें पार्टी का उम्मीदवार बनाया जा सकता है। हालांकि, करीम चौधरी ने इस मुद्दे पर अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है और वे फिलहाल कोलकाता में हैं।
इस सीट से तृणमूल उम्मीदवार कन्हैयालाल अग्रवाल ने कहा कि वे करीम चौधरी को सम्मानपूर्वक चुनाव प्रचार में शामिल होने का निमंत्रण देंगे, लेकिन उनके समर्थकों के विरोध को उन्होंने ज्यादा महत्व नहीं दिया।
अलीपुरद्वार में बयानबाजी से बढ़ी असहजता
अलीपुरद्वार सीट पर तृणमूल द्वारा सुमन कांजीलाल को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष और बढ़ गया है। सुमन कांजीलाल पहले भाजपा के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं, जिससे पुराने कार्यकर्ताओं में नाराजगी है।
पूर्व विधायक सौरभ चक्रवर्ती ने सोशल मीडिया पर इशारों में पार्टी की नीति पर सवाल उठाए, हालांकि बाद में उन्होंने अपने पोस्ट हटा दिए और इसे व्यक्तिगत टिप्पणी बताया। वहीं, वरिष्ठ नेता जहर मजूमदार ने खुले तौर पर सुमन कांजीलाल की आलोचना करते हुए उन्हें “बेईमान” कहा और लोगों से उन्हें वोट न देने की अपील की। इन बयानों ने पार्टी के भीतर असहज स्थिति पैदा कर दी है, हालांकि तृणमूल नेतृत्व ने इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
उत्तर बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर टिकट बंटवारे को लेकर उभरा असंतोष पार्टी के लिए चुनौती बनता दिख रहा है। एक ओर खगेश्वर राय का अल्टीमेटम है, दूसरी ओर करीम चौधरी को लेकर सियासी अटकलें और अलीपुरद्वार में खुले विरोध के स्वर-ये सभी घटनाएं संकेत देती हैं कि चुनाव से पहले संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखना आसान नहीं होगा।
यदि समय रहते असंतोष को नियंत्रित नहीं किया गया, तो इसका असर चुनावी परिणामों पर भी पड़ सकता है और विपक्षी दल इसे अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश करेंगे।