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TMC से अलग होने के बाद हुमायूं कबीर का बड़ा दांव, 182 सीटों पर उतरेगी पार्टी

चुनावी बिगुल: नए खिलाड़ी की एंट्री से तेज हुई हलचल। AIMIM से गठबंधन की दिशा में बढ़त, मुर्शिदाबाद-मालदा में खास रणनीति।

By श्वेता सिंह

Mar 19, 2026 10:17 IST

कोलकाताः पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। इसी बीच पूर्व तृणमूल कांग्रेस नेता हुमायूं कबीर ने अपनी नई पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी के जरिए बड़ा चुनावी दांव चल दिया है। उन्होंने ऐलान किया कि उनकी पार्टी राज्य की कुल 294 सीटों में से 182 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी।

कबीर का यह फैसला ऐसे समय आया है जब राज्य की प्रमुख पार्टियां-तृणमूल कांग्रेस, भाजपा और वाम दल-पहले ही अपनी चुनावी तैयारियों को तेज कर चुकी हैं। ऐसे में कबीर की पार्टी की एंट्री मुकाबले को और दिलचस्प और बहुकोणीय बना सकती है।

18 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी

कबीर ने जानकारी दी कि पार्टी अब तक 18 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर चुकी है। इस सूची में मुख्य रूप से मुर्शिदाबाद और मालदा जिलों को शामिल किया गया है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, इन जिलों में पार्टी का फोकस यह दर्शाता है कि मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में अपनी मजबूत पकड़ बनाने की कोशिश कर रही है।

खुद हुमायून कबीर ने रानीनगर के साथ-साथ मुर्शिदाबाद की रेजीनगर और नौदा सीटों से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। यह भी उल्लेखनीय है कि उन्होंने अपनी पारंपरिक भरतपुर सीट से इस बार चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है, जो उनकी नई रणनीति की ओर इशारा करता है।

AIMIM के साथ तालमेल

हुमायूं कबीर की पार्टी अकेले नहीं, बल्कि गठबंधन के साथ चुनाव लड़ने की तैयारी में है। कबीर ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के साथ तालमेल में आगे बढ़ रही है। AIMIM करीब 8 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है।

इस संबंध में असदुद्दीन ओवैसी से बातचीत हो चुकी है। हालांकि, कबीर ने फिलहाल ज्यादा जानकारी साझा करने से परहेज किया और कहा कि जल्द ही स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। AIMIM के पश्चिम बंगाल ऑब्जर्वर आदिल हुसैन के साथ उनकी बैठक प्रस्तावित है, जिसमें सीट बंटवारे और साझा रणनीति पर चर्चा होगी।

राजनीतिक बयानबाजी तेज

चुनावी रणनीति के साथ-साथ कबीर ने राजनीतिक हमला भी तेज कर दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को खुली चुनौती देते हुए कहा कि उन्हें केवल भवानीपुर सीट पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि एक और सीट से भी चुनाव लड़ना चाहिए।

कबीर का यह बयान ऐसे समय आया है जब तृणमूल कांग्रेस 291 सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर चुकी है और ममता बनर्जी फिर से भवानीपुर से चुनाव लड़ने जा रही हैं। भवानीपुर सीट इस बार सबसे चर्चित सीटों में शामिल हो सकती है। विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी भी यहां से चुनाव लड़ेंगे। यह मुकाबला राज्य का सबसे हाई-प्रोफाइल चुनावी संघर्ष बन सकता है।

बंगाल में दो चरणों में वोटिंग

चुनाव आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, पश्चिम बंगाल में मतदान दो चरणों में कराया जाएगा। 23 अप्रैल को 152 सीटों पर मतदान होगा, जबकि 29 अप्रैल को 142 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। इसके बाद 4 मई को मतगणना होगी और परिणाम घोषित किए जाएंगे।

विवाद के बाद बनायी नयी पार्टी

हुमायूं कबीर का यह नया राजनीतिक सफर विवादों के बाद शुरू हुआ। दिसंबर 2025 में उन्हें तृणमूल कांग्रेस से निलंबित कर दिया गया था। यह कार्रवाई मुर्शिदाबाद जिले में ‘बाबरी मस्जिद’ जैसी संरचना बनाने के प्रस्ताव और उससे जुड़े कार्यक्रम के कारण हुई थी। पार्टी से अलग होने के बाद उन्होंने आम जनता उन्नयन पार्टी का गठन किया, जिसे चुनाव आयोग से प्रारंभिक मंजूरी मिल चुकी है। अब वे अपनी नई राजनीतिक पहचान के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।

मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में असर की कोशिश

राज्य में पहले से तृणमूल कांग्रेस, भाजपा और वाम दल सक्रिय हैं। भाजपा भी 144 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर चुकी है। ऐसे में हुमायूं कबीर की पार्टी का चुनावी मैदान में उतरना खासकर मुस्लिम बहुल इलाकों में समीकरण बदल सकता है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर हुमायूं की पार्टी और AIMIM का गठबंधन मजबूत होता है, तो इसका असर कई सीटों पर देखने को मिल सकता है। हालांकि, असली स्थिति तब साफ होगी जब 22 मार्च तक पूरी उम्मीदवार सूची और गठबंधन की औपचारिक घोषणा सामने आएगी। आने वाले कुछ दिन कबीर की पार्टी के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं। 22 मार्च तक उम्मीदवारों की पूरी सूची और 22–25 मार्च के बीच संभावित गठबंधन की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। इसके बाद ही यह तय हो सकेगा कि हुमायूं कबीर का यह दांव बंगाल की राजनीति में कितना असर डाल पाता है।

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