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दबंग अंदाज में चुनावी मैदान में उतरे दिलीप घोष, बाइक रैली से शक्ति प्रदर्शन

समर्थकों के नारों के बीच प्रचार का आगाज, बोले-एक लाख वोट से ज्यादा जीत का लक्ष्य।

सुमन घोष

खड़गपुर: भाजपा के वरिष्ठ नेता और खड़गपुर (सदर) विधानसभा सीट से उम्मीदवार दिलीप घोष ने चुनावी प्रचार की शुरुआत अपने पुराने ‘दबंग’ अंदाज में की। बुधवार सुबह जैसे ही वे खड़गपुर के चौरंगी इलाके में पहुंचे, समर्थकों की भीड़ ने “हमारे दादा जिंदाबाद” के नारों से पूरे माहौल को राजनीतिक उत्साह से भर दिया।

सिर पर पगड़ी, आंखों पर सनग्लास, गले में फूलों की माला और गेरुआ कुर्ता-पायजामा पहने दिलीप घोष का अंदाज पूरी तरह आत्मविश्वास से भरा नजर आया। भीड़ के बीच हाथ हिलाते हुए उन्होंने समर्थकों का अभिवादन किया और फिर सीधे अपने अभियान की शुरुआत कर दी।

बाइक रैली से आक्रामक शुरुआत

प्रचार के पहले ही दिन दिलीप घोष ने बाइक रैली के जरिए शक्ति प्रदर्शन किया। उन्होंने खुद रॉयल एनफील्ड बाइक चलाई, जबकि सुरक्षा कर्मी पीछे बैठे नजर आए। चौरंगी से शुरू हुई यह रैली गोलबाजार राम मंदिर तक पहुंची, जहां उन्होंने पूजा-अर्चना की। इसके बाद सोलापुरी माता मंदिर और ओल्ड सेटलमेंट स्थित माता मंदिर में भी दर्शन किए। दिनभर के व्यस्त कार्यक्रम के बाद रात में उन्होंने कौशल्या श्मशान काली मंदिर में पूजा कर अपने अभियान को धार्मिक आस्था से भी जोड़ा। हर पड़ाव पर भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भारी भीड़ उमड़ी, जो उनसे मिलने और उनका समर्थन जताने के लिए उत्साहित दिखे।

खड़गपुर की बदली राजनीतिक तस्वीर

खड़गपुर की राजनीति पिछले एक दशक में काफी बदली है। 2016 में दिलीप घोष ने यहां भाजपा को मजबूत करते हुए कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्ञान सिंह सोहन पाल को हराया था। हालांकि, 2019 के उपचुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। 2021 में पार्टी ने अभिनेता हिरण चट्टोपाध्याय को उम्मीदवार बनाकर सीट वापस हासिल की।

इस बार दिलीप घोष की वापसी के साथ ही पार्टी के अंदरूनी समीकरण भी चर्चा में हैं, खासकर हिरण और दिलीप के बीच की दूरी को लेकर। वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने प्रदीप सरकार को उम्मीदवार बनाया है, जो पहले उपचुनाव जीत चुके हैं और अब वापसी की कोशिश में हैं।

वोटर गणित और संगठन की रणनीति

खड़गपुर विधानसभा क्षेत्र में इस समय कुल मतदाताओं की संख्या करीब 1.92 लाख बताई जा रही है। एसआईआर की प्रक्रिया के बाद बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने की भी चर्चा है, जिससे चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।

तृणमूल कांग्रेस ने भी इस बार संगठनात्मक ढांचे में बदलाव करते हुए एकल नेतृत्व के बजाय कोर कमेटी मॉडल अपनाया है, ताकि चुनावी प्रबंधन को मजबूत किया जा सके। दिलीप घोष ने अपने समर्थकों के बीच बड़ा दावा करते हुए कहा कि खड़गपुर की जनता भाजपा को अपनी पार्टी मानती है और इस बार जीत का अंतर एक लाख वोट से ज्यादा होगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं को उत्साहित करते हुए कहा, “लक्ष्य एक लाख वोट से ज्यादा का है, उसी हिसाब से हमें पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरना होगा।”

विपक्ष के आरोप और जवाब

तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार प्रदीप सरकार ने दिलीप घोष को “बाहरी” बताते हुए उन पर विकास कार्य न करने का आरोप लगाया। इस पर दिलीप घोष ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जनता उनके काम से वाकिफ है और “बाहरी” का मुद्दा उठाने से कोई फायदा नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि जो दल पूरे देश से लोगों को लाकर चुनाव लड़ते हैं, वे उन्हें बाहरी बता रहे हैं।

खड़गपुर में दिलीप घोष की आक्रामक और ‘दबंग’ शैली में प्रचार की शुरुआत ने चुनावी मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। एक ओर उनका आत्मविश्वास और बड़ा लक्ष्य है, तो दूसरी ओर बदले हुए राजनीतिक समीकरण और विपक्ष की चुनौती। अब नजर इस बात पर रहेगी कि क्या दिलीप घोष अपने दावे के अनुसार भारी अंतर से जीत हासिल कर पाते हैं या खड़गपुर की यह लड़ाई और कड़ी होती है।

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