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उच्च शिक्षा में बदलाव पर विवाद: जयराम रमेश ने कहा-VBSA बिल से कमजोर हो सकती है संस्थानों की आज़ादी

UGC की भूमिका पर भी सवाल किया, कहा-उच्च शिक्षा में ब्यूरोक्रेसी का बढ़ेगा दखल

By डॉ. अभिज्ञात

Mar 19, 2026 15:48 IST

नयी दिल्लीः नई दिल्ली में प्रस्तावित विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (VBSA) बिल, 2025 को लेकर कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने गुरुवार को चिंता व्यक्त की। उन्होंने चेतावनी दी कि यह विधेयक देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों की शैक्षणिक स्वतंत्रता पर गहरा असर डाल सकता है।


IIT, IIM सहित राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों पर पड़ सकता है असर

रमेश ने अपने पत्र में कहा कि यह बिल “इंस्टीट्यूट्स ऑफ नेशनल इंपॉर्टेंस (INIs)” को भी अपने दायरे में लाता है। इनमें IIT, IIM, NIT, IIIT और IISER जैसे संस्थान शामिल हैं, जिन्हें अब तक पर्याप्त स्वायत्तता प्राप्त रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि IIT अधिनियम 1961 के तहत IITs को अपने शैक्षणिक कार्यक्रम स्वयं बनाने का अधिकार है और इसके लिए किसी अतिरिक्त मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन नए प्रस्तावित कानून के लागू होने पर यह व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

क्लॉज 49 को बताया सबसे विवादित प्रावधान

कांग्रेस नेता ने ड्राफ्ट बिल के क्लॉज 49 को लेकर विशेष चिंता जताई। उनके अनुसार, यह प्रावधान मौजूदा सभी कानूनों पर वरीयता देता है। हालांकि बिल में यह कहा गया है कि संस्थानों की स्वायत्तता प्रभावित नहीं होगी, लेकिन रमेश का कहना है कि इस बारे में स्पष्ट प्रावधान या व्यावहारिक व्यवस्था नहीं बताई गई है। ऐसे में आशंका है कि IIT और अन्य संस्थान नए आयोग के नियामक नियंत्रण में आ सकते हैं, जो पहले कभी नहीं हुआ।

UGC की परामर्श भूमिका कमजोर होने का आरोप

जयराम रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि यह विधेयक विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की मौजूदा परामर्श आधारित प्रणाली को कमजोर करता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान UGC कानून के तहत विश्वविद्यालयों के मानक तय करने, नियम बनाने और निरीक्षण करने जैसे कार्य विश्वविद्यालयों के साथ परामर्श करके किए जाते हैं। लेकिन नए बिल में इन अधिकारों को परिषदों को स्वतंत्र रूप से देने का प्रस्ताव है, जहां वे बिना किसी स्पष्ट सीमा के मानक तय कर सकती हैं, निरीक्षण कर सकती हैं और अन्य कार्य कर सकती हैं। इससे नियामक और संस्थानों के बीच संवाद कमज़ोर पड़ सकता है।

उच्च शिक्षा में ‘ब्यूरोक्रेटाइजेशन’ का खतरा

रमेश ने इस बिल की एक और अहम आलोचना करते हुए कहा कि इससे उच्च शिक्षा व्यवस्था में “ब्यूरोक्रेटाइजेशन” बढ़ सकता है। उनका कहना है कि वर्तमान में UGC, AICTE और NCTE जैसे संस्थानों का संचालन शिक्षाविदों द्वारा किया जाता है। लेकिन नए प्रस्ताव के तहत आयोग और उसकी तीन परिषदों का कार्यकारी संचालन सदस्य सचिवों द्वारा किया जाएगा, जो आमतौर पर नौकरशाह होते हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि शिक्षा का प्रशासन अकादमिक विशेषज्ञों के हाथ में ही रहना चाहिए, न कि नौकरशाही के नियंत्रण में।

उच्च शिक्षा ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी

VBSA बिल 2025 केंद्र सरकार की उस व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य उच्च शिक्षा के नियामक ढांचे में बदलाव करना है। यह विधेयक 15 दिसंबर 2025 को लोकसभा में पेश किया गया था और फिलहाल संसदीय समिति द्वारा इसकी समीक्षा की जा रही है।

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