कोलकाता/पश्चिम बंगाल: कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में 9 अगस्त 2024 की रात को हुई दर्दनाक घटना ने पूरे राज्य और देश को झकझोर दिया। उस रात 31 वर्षीय जूनियर डॉक्टर का सेमिनार हॉल की चौथी मंजिल पर बलात्कार किया गया और निर्मम तरीके से उसकी हत्या कर दी गयी। इस घटना ने महिलाओं की सुरक्षा और सरकारी जवाबदेही पर बहस को तेज कर दिया।
घटना के बाद पूरे राज्य में डॉक्टरों की हड़ताल और आम लोगों का प्रदर्शन देखने को मिला। CID ने प्रारंभिक जांच की, फिर मामले की जिम्मेदारी CBI को सौंप दी गई।
कोर्ट का फैसला और परिवार की नाराजगी
18 जनवरी 2025 को सियालदह एडिशनल सेशंस कोर्ट के जज अनिरबन दास ने मुख्य आरोपी संजय रॉय को बलात्कार और हत्या का दोषी ठहराया। 20 जनवरी को उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई। फिर भी परिवार संतुष्ट नहीं था। पीड़िता के माता-पिता का कहना है कि राज्य सरकार ने जांच में बाधा डाली और न्याय अधूरा है। उनका मानना है कि केवल एक आरोपी को सजा देकर मामला खत्म नहीं किया जा सकता।
BJP के टिकट पर राजनीतिक एंट्री
19 मार्च 2026 को यह खबर सामने आई कि पीड़िता की मां उत्तर 24 परगना की पानीहाटी विधानसभा सीट से BJP उम्मीदवार होंगी। शुरुआती प्रस्ताव पहले ठुकराया गया था, लेकिन अब उन्होंने स्वयं चुनाव लड़ने का फैसला लिया। उन्होंने कहा, “राज्य में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं और भ्रष्टाचार हर गली-मोहल्ले में फैला है। मैं BJP के साथ जनता की सेवा करूंगी और न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाऊंगी।”
पानीहाटी सीट TMC का गढ़ मानी जाती है, जहां पार्टी ने पिछले पांच चुनावों में चार बार जीत दर्ज की है। इस बार सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला होगा: BJP (पीड़िता की मां), TMC (तीर्थंकर घोष, पूर्व विधायक निर्मल घोष के बेटे) और CPM (कलातन दासगुप्ता, आरजी कर प्रदर्शन के प्रमुख चेहरे)।
पति का बयान और चुनाव का मकसद
पीड़िता के पिता ने मीडिया से कहा, “BJP ने हमें काफी पहले प्रस्ताव दिया था। हमसे कई बार संपर्क किया। आखिरकार उन्होंने मेरी पत्नी को पानीहाटी से टिकट देने का फैसला किया। हमारा मकसद सिर्फ बेटी के लिए न्याय और लोगों की सेवा करना है।”
मां ने भी स्पष्ट किया, “मैं BJP उम्मीदवार बनकर लड़ना चाहती हूं। मेरी प्राथमिकता सत्ता नहीं बल्कि न्याय और महिलाओं की सुरक्षा है। मैं जनता के साथ मिलकर काम करूंगी।”
राजनीतिक और सामाजिक महत्व
यह कदम केवल चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और न्याय की लड़ाई का प्रतीक है। भाजपा के साथ राजनीति में एंट्री करने से परिवार को उम्मीद है कि न्याय की लड़ाई और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनावी मुकाबला केवल राजनीतिक सीट पर केंद्रित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे राज्य में महिलाओं की सुरक्षा और न्याय की राजनीति पर संदेश देगा। परिवार का मकसद सत्ता हासिल करना नहीं बल्कि न्याय सुनिश्चित करना और समाज की सेवा करना है।
पीड़िता की मां की चुनावी एंट्री न्याय की लड़ाई को विधानसभा तक ले जा रही है। यह फैसला न केवल परिवार के लिए बल्कि पूरे राज्य की महिलाओं की सुरक्षा, न्याय और राजनीतिक जागरूकता के लिए महत्वपूर्ण है। यह चुनावी मैदान सिर्फ सत्ता का संघर्ष नहीं बल्कि संवेदनशील सामाजिक संदेश का प्रतीक बन गया है।