वाशिंगटनः अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच पेंटागन ने बड़ा दावा किया है। अमेरिकी सेना ने “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के तहत ईरान में व्यापक सैन्य कार्रवाई करते हुए हजारों लक्ष्यों को निशाना बनाया है।
भारी बमों से भूमिगत ठिकानों पर हमला
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, करीब 5,000 पाउंड वजन वाले विशेष बमों का इस्तेमाल उन भूमिगत ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया गया, जहां मिसाइल और सैन्य सामग्री रखी गई थी। इन हमलों में तटीय रक्षा मिसाइल, नौसेना के गोदाम और खदान (माइन) भंडारण स्थलों को भी टारगेट किया गया।
7,000 से ज्यादा सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना
पेंटागन के मुताबिक अब तक 7,000 से अधिक लक्ष्यों पर हमले किए जा चुके हैं। इसमें समुद्र में मौजूद सैन्य संसाधन भी शामिल हैं, जिनमें 120 से ज्यादा जहाज और कई माइन बिछाने वाले पोत बताए जा रहे हैं।
ईरानी रक्षा क्षमता को बड़ा झटका देने का दावा
अमेरिकी रक्षा नेतृत्व का कहना है कि इन हमलों से ईरान की सैन्य क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचा है। खास तौर पर मिसाइल और ड्रोन बनाने वाली इकाइयों को भारी क्षति हुई है, जिससे नए हथियार तैयार करने की क्षमता कमजोर हुई है। इसके अलावा अमेरिका का दावा है कि उसकी कार्रवाई के बाद उसके खिलाफ होने वाले बैलिस्टिक मिसाइल हमलों में काफी कमी आई है।
हवाई और नौसैनिक ताकत पर असर
बताया गया है कि ईरान के कई सैन्य जहाजों को नुकसान पहुंचा या उन्हें नष्ट कर दिया गया है। साथ ही, पनडुब्बियों और हवाई रक्षा प्रणाली पर भी असर पड़ा है, जिससे उसकी समुद्री और हवाई सुरक्षा कमजोर हुई है।
तनाव की पृष्ठभूमि: बड़े घटनाक्रम से भड़का संघर्ष
यह पूरा घटनाक्रम उस समय शुरू हुआ जब फरवरी के अंत में ईरान के शीर्ष नेता की एक संयुक्त सैन्य कार्रवाई में मौत हो गई थी। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिका और उसके सहयोगियों के ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर असर, वैश्विक बाजार चिंतित
इस संघर्ष का असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देखने को मिल रहा है। ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर लगभग नियंत्रण कर लिया है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग माना जाता है। इससे तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ा है।
नेतृत्व में बदलाव, नई स्थिति पर नजर
ईरान में नेतृत्व परिवर्तन भी हुआ है, जहां नए सर्वोच्च नेता के रूप में मोजतबा खामेनेई को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस बदलते राजनीतिक और सैन्य माहौल पर दुनिया की नजर बनी हुई है।