देहरादूनः उत्तराखंड में एक बार फिर मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा तेज हो गई है और इस बार संकेत पहले से कहीं अधिक स्पष्ट माने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अगुवाई वाली सरकार आज कैबिनेट विस्तार कर सकती है। माना जा रहा है कि आज पांच नए मंत्री लेंगे शपथ। इसे न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से शुभ समय माना जा रहा है, बल्कि राजनीतिक तौर पर भी यह फैसला अहम हो सकता है, क्योंकि राज्य में विधानसभा चुनाव फरवरी 2027 में प्रस्तावित हैं और उसके लिए समय अब तेजी से कम होता जा रहा है।
साल 2022 में भाजपा सरकार बनने के बाद धामी मंत्रिमंडल का गठन आठ मंत्रियों के साथ हुआ था। संवैधानिक प्रावधानों के तहत उत्तराखंड में मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 12 मंत्री हो सकते हैं, लेकिन वर्तमान में कैबिनेट में केवल सात मंत्री ही कार्यरत हैं। पिछले कुछ समय में दो प्रमुख घटनाओं के कारण मंत्रिमंडल में रिक्तियां बढ़ीं। सामाजिक कल्याण और परिवहन मंत्री चंदन राम दास के निधन के बाद एक पद खाली हुआ, वहीं वित्त और संसदीय कार्य मंत्री प्रेम चंद अग्रवाल के इस्तीफे से एक और स्थान रिक्त हो गया। इस तरह कुल पांच पद ऐसे हैं जिन्हें भरा जाना बाकी है।
खाली पदों को भरने की तैयारी
दिलचस्प यह है कि बीते चार वर्षों में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कई बार चर्चाएं हुईं, लेकिन हर बार मामला किसी न किसी कारण से टलता रहा। अब जो परिस्थितियां बन रही हैं, वे संकेत देती हैं कि इस बार निर्णय टलने की संभावना कम है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय नेतृत्व से इस विषय पर विस्तृत मंथन हो चुका है और अंतिम सहमति बनने के बाद आज ही कैबिनेट विस्तार की संभावना है।
भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने भी यह स्पष्ट किया है कि कैबिनेट विस्तार एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है, लेकिन इसका अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व ही करता है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार विकास, जनसेवा और सुशासन के एजेंडे पर काम कर रही है और इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए मंत्रिमंडल को पूर्ण आकार देने पर विचार किया जा रहा है।
बजट और विकास के बीच राजनीतिक रणनीति
राज्य सरकार के हालिया कदम भी इस संभावित विस्तार को और महत्वपूर्ण बना रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1.11 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया है, जो पिछले साल की तुलना में लगभग दस प्रतिशत अधिक है। सरकार ने इस बजट को गरीबों, युवाओं, किसानों और महिलाओं पर केंद्रित बताया है। मुख्यमंत्री धामी पहले ही इसे विकसित उत्तराखंड की दिशा में निर्णायक कदम बता चुके हैं। इसके साथ ही राज्य में दो लाख करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाएं भी प्रगति पर हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कैबिनेट विस्तार सिर्फ प्रशासनिक जरूरत नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति का भी अहम हिस्सा है। इससे सरकार को अलग-अलग क्षेत्रों और सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने का अवसर मिलेगा, जिससे संगठनात्मक संतुलन मजबूत किया जा सकेगा। आगामी चुनाव को देखते हुए यह कदम भाजपा के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।
चुनाव से पहले संतुलन साधने की कोशिश
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने भी हाल के दिनों में संकेत दिए हैं कि मंत्रिमंडल विस्तार आज हो सकता है। फिलहाल राज्य की राजनीति में यह मुद्दा केंद्र में है और आम जनता से लेकर राजनीतिक गलियारों तक सभी की नजर इस संभावित विस्तार पर टिकी हुई है।