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युद्ध के चलते गैस को लेकर स्थिति चिंताजनक, केंद्र ने माना

केंद्र की टिप्पणी ने बढ़ाई टेंशन - रसोई गैस को लेकर चिंता और गहराई।

नई दिल्ली : रसोई को लेकर चिंता कम होने के कोई संकेत नहीं हैं। उल्टे सप्ताहांत में केंद्र सरकार के बयान से रसोई गैस को लेकर चिंता और कई गुना बढ़ गई। एलपीजी की आपूर्ति कुल मिलाकर सामान्य होने का दावा करने के बावजूद शुक्रवार को केंद्र ने मान लिया कि समग्र स्थिति अभी भी काफी ‘चिंताजनक’ है। इस स्थिति में ग्राहकों को जितना संभव हो पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) के इस्तेमाल की सलाह दी गई है।

ईरान बनाम अमेरिका-इजरायल युद्ध सैन्य ताकत के प्रदर्शन से आगे बढ़कर अब ऊर्जा भंडार पर भी असर डाल चुका है। और इसका प्रभाव भारत के ऊर्जा उत्पादों पर भी पड़ना शुरू हो गया है। देश में एलपीजी या रसोई गैस की मांग असामान्य रूप से बढ़ने से केंद्र की चिंता लगातार बढ़ रही है।

इस स्थिति में देश के जिन इलाकों में पीएनजी का ढांचा मौजूद है, वहां पाइपलाइन के जरिए अधिक गैस कनेक्शन देने के लिए संबंधित कंपनियों को पेट्रोलियम मंत्रालय ने निर्देश दिए हैं। इतना ही नहीं, जहां पीएनजी की सुविधा है, वहां एलपीजी कनेक्शन देने में भी केंद्र सख्ती कर रहा है। जमाखोरी रोकने के लिए राज्यों को और कड़ी निगरानी के निर्देश दिए गए हैं ताकि ‘पैनिक बुकिंग’ के कारण बढ़ी अतिरिक्त मांग को नियंत्रित किया जा सके।

पेट्रोलियम मंत्रालय की सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि एलपीजी पर दबाव कम करने के लिए अब तक 13,700 से ज्यादा पीएनजी कनेक्शन दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन बुकिंग की दर बढ़कर 93 प्रतिशत पहुंच गई है और गुरुवार को एक ही दिन में करीब 55 लाख रिफिल के आवेदन आए। समग्र स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए अमेरिका जैसे देशों से गैस के वैकल्पिक आयात पर भी जोर दिया जा रहा है। हाल की एक विश्लेषण में एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल और गैस आपूर्ति में बाधा आने से भारत धीरे-धीरे अमेरिका की ओर वैकल्पिक स्रोत के रूप में झुक रहा है।

केंद्र के परस्पर विरोधी बयान और हाल के कुछ फैसलों से ग्राहकों से लेकर डिस्ट्रीब्यूटर्स के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। एक हफ्ते के भीतर ऑटो एलपीजी की कीमत दो बार बढ़ चुकी है। व्यावसायिक के साथ-साथ घरेलू गैस के दाम भी बढ़ चुके हैं। पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति 21 दिन बाद और गंभीर होने पर शुक्रवार को तेल कंपनियों ने औद्योगिक उपयोग वाले डीजल और प्रीमियम पेट्रोल की कीमत बढ़ा दी। गैस सिलेंडर बुकिंग को लेकर जिस तरह खींचतान चल रही है और केंद्र वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल की बात कर रहा है उससे इंडेन, एचपी और भारत गैस के डिस्ट्रीब्यूटर्स और डीलर्स को आशंका है कि गैस के दाम फिर बढ़ सकते हैं।

उनके अनुसार आम लोग मुख्यतः दो कारणों से गैस की पैनिक बुकिंग कर रहे हैं। पहला, युद्ध की स्थिति के कारण सिलेंडर की समय पर आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता। दूसरा, पहले ही प्रति सिलेंडर 60 रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है। लंबे समय से चल रहे युद्ध के कारण गैस आपूर्ति सामान्य नहीं है इस बात को आम लोग लेकर आश्वस्त हैं। इसलिए एक और बार कीमत बढ़ने की आशंका में कई लोग पहले से ही सिलेंडर बुक कर रहे हैं। ऑल इंडिया एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर फेडरेशन के उपाध्यक्ष बिजन विश्वास ने भी सहमति जताते हुए कहा कि अगर सिलेंडर की कीमत बढ़ाई जाती है तो पैनिक बुकिंग पर कुछ हद तक लगाम लग सकती है। हालांकि अभी पांच राज्यों में चुनाव आने वाले हैं। ऐसे में गैस की कीमत बढ़ाना काफी साहसिक कदम होगा और इसका चुनाव पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

भारत का घरेलू उत्पादन कुल मांग का लगभग 41 प्रतिशत ही पूरा करता है बाकी हिस्सा आयात के जरिए आता है। अब तक इस आयात का बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से आता था लेकिन मौजूदा हालात में पश्चिम एशिया पर निर्भरता कम करने के लिए भारत मजबूर हो रहा है। आंकड़ों के अनुसार 19 मार्च को समाप्त सप्ताह में भारत का कुल एलपीजी आयात घटकर 2,65,000 मीट्रिक टन रह गया, जो 5 मार्च तक समाप्त सप्ताह में 3,22,000 मीट्रिक टन था। इसी अवधि में पश्चिम एशिया से आपूर्ति घटकर केवल 89,000 मीट्रिक टन रह गई, जो कुल आयात का 34 प्रतिशत है। इसके विपरीत वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति बढ़कर 1,76,000 मीट्रिक टन हो गई जो पिछले सप्ताह शून्य थी। उल्लेखनीय है कि 2026 के लिए अमेरिका से 22 लाख मीट्रिक टन एलपीजी आयात का दीर्घकालिक समझौता भारत ने सुरक्षित कर लिया है। विशेषज्ञों के अनुसार यह केवल अल्पकालिक संकट से निपटने की रणनीति नहीं, बल्कि भविष्य में आपूर्ति जोखिम कम करने के लिए एक दीर्घकालिक रणनीतिक कदम भी माना जा सकता है।

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