नई दिल्ली : भारत की समुद्री ताकत को और मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारतीय नौसेना 3 अप्रैल को अपने नए स्टेल्थ फ्रिगेट ‘तारागिरी’ (F41) को सेवा में शामिल करने जा रही है। यह अवसर देश की समुद्री सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में होने वाला यह कार्यक्रम भारत के स्वदेशी रक्षा निर्माण की बढ़ती क्षमता को दर्शाएगा। ‘तारागिरी’ प्रोजेक्ट 17A के तहत तैयार चौथा उन्नत युद्धपोत है, जिसका वजन लगभग 6,670 टन है। यह जहाज ‘मेक इन इंडिया’ पहल का सशक्त उदाहरण भी है।
मुंबई के मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा बनाए गए इस फ्रिगेट में पहले के मॉडलों की तुलना में बेहतर डिजाइन है और इसे मुश्किल से ही रडार पहचान पायेगा, जिससे यह दुश्मन की नजरों से बचकर प्रभावी कार्रवाई कर सकता है। इसमें 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जिससे देश के सैकड़ों MSME उद्योगों को बढ़ावा मिला है और बड़ी संख्या में रोजगार भी सृजित हुए हैं।
यह युद्धपोत डीजल और गैस आधारित इंजन प्रणाली से संचालित होता है, जो इसे तेज गति और लंबी दूरी तक संचालन की क्षमता प्रदान करता है। इसे विभिन्न प्रकार के समुद्री अभियानों के लिए तैयार किया गया है।
हथियारों के मामले में भी ‘तारागिरी’ बेहद आधुनिक है। इसमें सुपरसोनिक मिसाइलें, मध्यम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली और पनडुब्बी रोधी उपकरण शामिल हैं। इन सभी को एक उन्नत कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम से जोड़ा गया है, जिससे युद्ध के दौरान तुरंत और सटीक प्रतिक्रिया संभव हो पाती है।
सिर्फ युद्ध ही नहीं, यह जहाज मानवीय सहायता और आपदा राहत जैसे कार्यों के लिए भी उपयुक्त है। इसका लचीला संचालन ढांचा इसे विभिन्न परिस्थितियों में उपयोगी बनाता है।
भारतीय नौसेना लगातार एक मजबूत, विश्वसनीय और आत्मनिर्भर बल के रूप में विकसित हो रही है, जो देश के समुद्री हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। ‘तारागिरी’ इसी दिशा में एक और मजबूत कदम है, जो भारत की बढ़ती समुद्री शक्ति का प्रतीक बनेगा।