तेल अवीवः इजरायल के रक्षामंत्री इजराइल कार्ट्ज ने शनिवार को कहा कि ईरान के खिलाफ हमलों की तीव्रता अगले हफ्ते महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाई जाएगी। उन्होंने इजरायली सैन्य मुख्यालय में अधिकारियों के साथ बैठक में कहा कि आने वाले हमलों में इजरायली सेना और अमेरिकी सेना मिलकर कार्य करेंगी। कात्ज ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई केवल सैन्य ठिकानों पर हमले तक सीमित नहीं है, बल्कि ईरान की रणनीतिक और सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने की दिशा में है।
युद्ध की रणनीतिः सैन्य अभियान का असर
विशेषज्ञों के अनुसार, इस अभियान को फरवरी 2026 में शुरू किया गया और इसे “ऑपरेशन लॉयन्स रोर” नाम दिया गया। अभियान का उद्देश्य ईरान के सैन्य ठिकानों और परमाणु ढाँचों को निशाना बनाना है। इस अभियान में अमेरिकी विशेष बलों की मदद ली जा रही है। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य ठिकानों में तेहरान और अन्य प्रमुख शहर शामिल हैं। लक्ष्य ईरानी कमांडरों को निष्क्रिय करना और उनकी रणनीतिक क्षमताओं को कमजोर करना है। इजरायल का कहना है कि हमलों का उद्देश्य केवल सैन्य नुकसान नहीं, बल्कि ईरान पर राजनीतिक और रणनीतिक दबाव बनाना भी है। विशेषज्ञों का कहना है कि हमलों में सटीक निशाना और सीमित क्षेत्रीय प्रभाव पर ध्यान दिया गया है ताकि व्यापक युद्ध की संभावना कम रहे।
ईरान का जवाबी हमला
ईरान ने अब तक मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए अपना विरोध जाहिर किया है। लेबनान में समर्थ हिजबुल्लाह और अन्य क्षेत्रीय समूह भी सक्रिय हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी बाहरी हमले का जवाब कड़ा होगा। विश्लेषकों का कहना है कि इस संघर्ष का असर कई स्तरों पर दिखाई दे रहा है। मध्य पूर्व में अस्थिरता बढ़ रही है, पड़ोसी देशों में सुरक्षा खतरे बढ़ सकते हैं और तेल और ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता का माहौल बन गया है।
अमेरिका का अंतिम निर्णय बाकी
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका ने ईरान की परमाणु सामग्री को सुरक्षित निकालने की योजना बनाई है। संभावित सैन्य अभियान में अमेरिकी विशेष बल शामिल हो सकते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप का अंतिम निर्णय अभी बाकी है। इस कदम का उद्देश्य ईरान की परमाणु क्षमता पर नियंत्रण रखना और उसकी रणनीतिक ताकत को सीमित करना है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर अमेरिका यह कदम उठाता है तो संघर्ष और तेज और संवेदनशील हो जाएगा।
युद्ध का खामियाजा
इस युद्ध के कारण हजारों नागरिक मारे गए हैं और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। सीमाओं के पास रहने वाले नागरिकों में भय और असुरक्षा की भावना बढ़ गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर हमले जारी रहते हैं तो मध्य पूर्व की स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा पर दीर्घकालिक असर पड़ेगा।
तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव तेल आपूर्ति के लिए जोखिम पैदा कर रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंदी के संकेत भी दिखाई दे रहे हैं।
इजरायल का अगला कदम
कात्ज ने साफ किया कि इजरायल अपने सभी सैन्य और रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल किए बिना पीछे नहीं हटेगा। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले हफ्तों में हमलों की तीव्रता और रणनीति और बढ़ सकती है। इसके चलते ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमता पर गंभीर असर पड़ेगा। क्षेत्रीय तनाव बढ़ेगा और तेल बाजार पर प्रभाव लंबे समय तक महसूस होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस संघर्ष का असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता पर भी इसका असर दिखाई देगा।