नई दिल्लीः बहुचर्चित लैंड फॉर जॉब केस में दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को अहम हस्तक्षेप करते हुए पूर्व बिहार मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की याचिका पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जवाब मांगा है। राबड़ी देवी ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें 1600 से अधिक 'अनरिलायड' दस्तावेज उपलब्ध कराने से इंकार कर दिया गया था।
जस्टिस मनोज जैन की एकल पीठ ने इस मामले में नोटिस जारी करते हुए CBI को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया और अगली सुनवाई के लिए 1 अप्रैल 2026 की तारीख तय की। राबड़ी देवी और उनके पति लालू प्रसाद यादव का तर्क है कि ये दस्तावेज गवाहों से जिरह करने और अपने बचाव को प्रभावी ढंग से तैयार करने के लिए आवश्यक हैं।
ट्रायल कोर्ट ने क्यों ठुकराई थी मांग
इससे पहले 18 मार्च 2026 को दिल्ली की विशेष अदालत (जज विशाल गोगने) ने राबड़ी देवी, लालू प्रसाद यादव और अन्य आरोपियों की याचिकाएं खारिज कर दी थीं। अदालत ने अपने 35 पृष्ठों के आदेश में कहा था कि सभी 'अनरिलायड दस्तावेज' एक साथ उपलब्ध कराना 'गाड़ी को घोड़े से पहले रखने' जैसा होगा, जिससे न्यायिक प्रक्रिया बाधित हो सकती है।
कोर्ट ने यह भी कहा- आरोपियों को पहले ही दस्तावेजों की जांच का अवसर मिल चुका है 'अनरिलायड दस्तावेज' वे हैं जिन्हें CBI ने चार्जशीट में शामिल नहीं किया। ट्रायल की शुरुआत में ऐसे दस्तावेज देने का कोई स्वतः अधिकार नहीं है। इससे मुकदमे में अनावश्यक देरी की आशंका है।
इसी आधार पर अन्य आरोपियों-लालू के निजी सचिव आर.के.महाजन और पूर्व जनरल मैनेजर महिप कपूर की याचिकाएं भी खारिज कर दी गई थीं।
क्या है पूरा मामला?
लैंड फॉर जॉब मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। आरोप है कि पश्चिम मध्य रेलवे (जबलपुर) में ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से जमीन ली गई, जिसे कथित तौर पर लालू परिवार या उनके सहयोगियों के नाम हस्तांतरित किया गया।
CBI ने इस मामले में 18 मई 2022 को FIR दर्ज की थी।
कुल 103 आरोपी, जिनमें से 5 की मृत्यु हो चुकी है। चार्जशीट में 421 रिलायड दस्तावेज। जबकि 1,675 अनरिलायड दस्तावेज। जनवरी 2026 में विशेष अदालत ने लालू प्रसाद, राबड़ी देवी और अन्य सहित 46 आरोपियों पर आरोप तय किए, जबकि 52 को डिस्चार्ज कर दिया गया।
मौजूदा समय में ट्रायल जारी
मामला फिलहाल ट्रायल चरण में है और गवाहों की जांच शुरू हो चुकी है। ऐसे में हाईकोर्ट का यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ‘अनरिलायड’ दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते हैं, तो इससे बचाव पक्ष को अपनी दलील मजबूत करने का अवसर मिल सकता है। वहीं, CBI का पक्ष है कि ऐसे दस्तावेजों को इस स्तर पर देने से ट्रायल प्रभावित हो सकता है।
राजनीतिक स्तर पर भी यह मामला चर्चा में है। जहां आरजेडी इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है, वहीं जांच एजेंसी इसे बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मामला मानती है।
आगे की कार्रवाई क्या होगी ?
अब इस मामले में अगली सुनवाई 1 अप्रैल 2026 को होगी, जब CBI अपना पक्ष अदालत के सामने रखेगी। हाईकोर्ट का आगामी निर्णय न केवल इस केस की दिशा तय कर सकता है, बल्कि ट्रायल की गति और रणनीति पर भी असर डाल सकता है।