पटना: राज्यसभा चुनाव के मतदान में आमतौर पर ज्यादा रोमांच नहीं होता। चुनाव से पहले ही लगभग तय हो जाता है कि कौन-कौन उम्मीदवार जीतेंगे लेकिन सोमवार को राज्यसभा चुनाव को लेकर बिहार और ओडिशा में जबरदस्त राजनीतिक नाटक देखने को मिला। बिहार में वोट बहिष्कार और ओडिशा में क्रॉस वोटिंग के कारण विपक्षी खेमे की मुश्किलें बढ़ गईं। वहीं दूसरी ओर सभी सीटों पर जीत को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन पूरी तरह आत्मविश्वास से भरा नजर आया।
बिहार में आरजेडी-कांग्रेस को झटका, 4 विधायकों ने नहीं डाला वोट
बिहार में महागठबंधन को बड़ा झटका लगा। एनडीए के चार उम्मीदवारों की जीत पहले से ही लगभग तय थी। मुकाबला पांचवीं सीट के लिए था। समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया के अनुसार, राष्ट्रीय जनता दल के विधायक फैसल रहमान और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के तीन विधायक— मनोहर प्रसाद, सुरेंद्र कुशवाहा और मनोज विश्वास, सोमवार को मतदान के लिए नहीं पहुंचे।
इससे महागठबंधन के वोटों की संख्या 37 पर रुक गई। दूसरी ओर एनडीए के सभी 202 विधायकों ने मतदान किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे एनडीए के पांचवें उम्मीदवार शिवेश कुमार की जीत लगभग तय हो गई है। अनुमान है कि उन्हें 38 वोट मिल सकते हैं।
ओडिशा में हंगामा: बीजेपी-बीजेडी भिड़ंत, क्रॉस वोटिंग का आरोप
ओडिशा में स्थिति और ज्यादा तनावपूर्ण हो गई। भुवनेश्वर में मतदान के दौरान भारतीय जनता पार्टी और बीजू जनता दल के विधायकों के बीच हाथापाई शुरू हो गई। क्रॉस वोटिंग के आरोप को लेकर ही यह विवाद भड़का। बीजेडी नेता देविरंजन त्रिपाठी पर बीजेपी उम्मीदवार दिलीप बाबू को वोट देने का आरोप लगा। उन्होंने इस आरोप से इनकार भी नहीं किया। उल्टा उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि बीजू के आदर्शों को बचाने के लिए ही मैंने दिलीप बाबू को वोट दिया। यह पार्टी नवीन बाबू की प्राइवेट लिमिटेड कंपनी नहीं है।
कांग्रेस में भी बगावत, ओडिशा में 3 विधायकों पर क्रॉस वोटिंग का आरोप
इधर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के ओडिशा प्रदेश अध्यक्ष भक्तचरण दास ने भी दावा किया कि पार्टी के तीन विधायक, रमेश जेना, दशरथी गोमांग और सोफिया फिरदौस ने क्रॉस वोटिंग की है। उन्होंने कहा कि यह विश्वासघात अप्रत्याशित था और आरोपित विधायकों के खिलाफ जल्द ही अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।