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कौन हैं निशांत कुमार? जिनकी एंट्री से बिहार की राजनीति में बढ़ी हलचल

बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार के बेटे निशांत कुमार राजनीति में प्रवेश कर चुके है। जेडीयू में नेतृत्व परिवर्तन और उत्तराधिकार की चर्चा तेज हो गई है।

By प्रियंका कानू

Mar 08, 2026 17:37 IST

पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने आधिकारिक रूप से जनता दल (यूनाइटेड) जॉइन कर लिया है, जिससे राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। उन्होंने अपने पिता के दो दशकों के कार्यकाल की सराहना की और पार्टी के मिशन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

अब तक राजनीति से दूरी बनाने वाले निशांत कुमार आखिर हैं कौन? कितने पढ़े-लिखे हैं निशांत कुमार? क्या आप जानते हैं राजनीति से अलग निशांत कुमार की दिलचस्पी किस क्षेत्र में है?

Good Returns की मीडिया रिपोर्ट की माने तो निशांत कुमार की व्यक्तिगत रूप से अध्यात्म में दिलचस्पी है। वह अब तक राजनीति से अलग अध्यात्म के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं।

कौन हैं निशांत कुमार?

निशांत कुमार का जन्म 20 जुलाई 1975 को हुआ था। वह नीतीश कुमार और मंजू सिन्हा के इकलौते बेटे हैं। उनकी मां मंजू सिन्हा का वर्ष 2007 में निधन हो गया था।

निशांत कुमार ने अपने जीवन का अधिकांश समय सार्वजनिक जीवन से दूर रहकर बिताया है। उन्होंने शुरुआती पढ़ाई पटना के सेंट कैरेंस स्कूल से की। इसके आगे की पढ़ाई मसूरी के मानव भारती इंटरनेशनल स्कूल से पूरी की। निशांत कुमार एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। वह रांची के बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (BIT), मेसरा के पूर्व छात्र रह चुके हैं।

आमतौर पर राजनैतिक परिवारों से आने वाले युवा जहां अपनी पढ़ाई पूरी करने से पहले ही राजनीति जॉइन कर लेते हैं लेकिन निशांत ने लंबे समय तक राजनीति से दूरी बनाए रखी।

वंशवाद की राजनीति से दूरी का रुख

पिछले कई वर्षों तक नीतीश कुमार की राजनीतिक छवि सुशासन बाबू की रही है जो वंशवाद की राजनीति से दूरी बनाकर चलते हैं। लेकिन नीतीश कुमार का राज्यसभा की ओर कदम बढ़ाना और निशांत कुमार का राजनीति में प्रवेश उस रुख से अलग माना जा रहा है।

जेडीयू के कई नेताओं का कहना है कि पार्टी के भीतर बढ़ती मांग की वजह से ही निशांत ने आखिरकार राजनीति में कदम रखने का फैसला लिया।

पर क्यों की गयी यह मांग?

बिहार की राजनीति के बारे में जानकारों का मानना है कि बढ़ती प्रतिस्पर्धा को देखते हुए पार्टी को ऐसा चेहरा चाहिए था जो निरंतरता बनाए रखे। इसके साथ ही पारंपरिक समर्थकों से भावनात्मक रूप से जुड़ा भी रहे। नेताओं का मानना है कि निशांत कुमार का नाम राज्य के कुर्मी समुदाय और पिछड़े तथा दलित वर्गों में खासा पहचाना जाता है जो लंबे समय से नीतीश कुमार के समर्थक रहे हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है निशांत कुमार की एंट्री?

निशांत कुमार की राजनीतिक शुरुआत जेडीयू के लिए एक बड़े ही महत्वपूर्ण समय पर हो रही है। नीतीश कुमार ने अपने जीवन के 75 बसंत पार कर लिया है और पार्टी के भीतर उनके भविष्य को लेकर चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि निशांत कुमार का राजनीति में सक्रिय होना संगठन को स्थिरता दे सकता है।

पार्टी में आधिकारिक तौर पर शामिल होने के बाद निशांत कुमार कार्यकर्ताओं को संबोधित भी किया। अपने संबोधन में निशांत ने अपने पिता द्वारा बिहार के लिए किए गए पिछले 20 सालों के कामों की सराहना की। निशांत कुमार ने सभी का धन्यवाद देते हुए कहा कि वे सभी के विश्वास पर खरा उतरने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि पिछले 20 वर्षों में उनके पिता ने जो काम किया है, उस पर उन्हें, पूरे बिहार और पूरे देश को गर्व है।

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