वजन कम करना हो या ब्लड शुगर नियंत्रित रखना, हर जगह अब फाइबर की अहमियत बढ़ गई है। चाहे दाल-चावल हो या सब्जी-ओट्स, फाइबर युक्त भोजन शामिल करना जरूरी माना जाता है। चावल, दाल, हरी सब्जियां, ओट्स और आटे जैसी कई चीजों में फाइबर पाया जाता है— कहीं ज्यादा तो कहीं कम। फाइबर कई बीमारियों का खतरा कम कर सकता है लेकिन सही मात्रा न रखने पर परेशानी भी हो सकती है।
आजकल लोग फाइबर की मात्रा देखकर ही खाना चुनते हैं। सिंपल कार्बोहाइड्रेट की जगह कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट की मांग बढ़ी है क्योंकि उसमें फाइबर ज्यादा होता है लेकिन सिर्फ फाइबर पर ध्यान देना सही नहीं है। डाइट में प्रोटीन, कार्ब्स और फैट का संतुलन जरूरी है। ज्यादा फाइबर खाने से भी समस्या हो सकती है।
फाइबर आयु बढ़ाने में मदद करता है
कई शोधों में पाया गया है कि रोजाना डाइट में 10 ग्राम अतिरिक्त फाइबर लेने से मृत्यु का खतरा लगभग 10 प्रतिशत तक कम हो सकता है। जो लोग पर्याप्त फाइबर लेते हैं, उनमें गंभीर बीमारियों का खतरा करीब 19 प्रतिशत कम पाया गया है।
कम होता है क्रॉनिक बीमारियों का खतरा
फाइबर युक्त भोजन से टाइप 2 डायबिटीज, हृदय रोग और कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा कम होता है। यह खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करके दिल की सेहत सुधारता है और कोलन कैंसर के जोखिम को भी घटाता है।
पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद
जिन लोगों के भोजन में फाइबर कम होता है, उनमें कब्ज की समस्या ज्यादा होती है। फाइबर पाचन को बेहतर बनाता है और आंतों में अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाता है, जिससे संक्रमण का खतरा कम होता है। यह शरीर में चर्बी जमा नहीं होने देता और पेट को लंबे समय तक भरा रखता है, जिससे वजन नियंत्रित रहता है।
रोजाना कितना फाइबर लेना चाहिए?
एक स्वस्थ वयस्क को रोजाना 25 से 38 ग्राम फाइबर लेना चाहिए। महिलाओं के लिए 25 से 28 ग्राम और पुरुषों के लिए 31 से 34 ग्राम फाइबर पर्याप्त माना जाता है। इसे पूरा करने के लिए ओट्स, दलिया, आटा, हरी सब्जियां, फल, दालें और मेवे खाए जा सकते हैं।
ज्यादा फाइबर खाने से क्या होता है?
अगर रोजाना 40 से 50 ग्राम या उससे ज्यादा फाइबर लिया जाए तो परेशानी हो सकती है। पेट दर्द, गैस, पेट फूलना जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। कई बार कब्ज भी हो सकता है। फाइबर के साथ रोज 2 से 3 लीटर पानी पीना जरूरी है, नहीं तो शरीर में पानी की कमी हो सकती है और पाचन सही नहीं रहता।