आयुर्वेद में सदियों से मुल्तानी मिट्टी का उपयोग होता आ रहा है। यह प्राकृतिक तत्व मुख्यतः त्वचा की देखभाल में प्रयोग होता है। यह त्वचा से अतिरिक्त तेल, गंदगी और बैक्टीरिया को साफ करता है। कोई मुल्तानी मिट्टी का फेसपैक इस्तेमाल करता है, तो कोई साबुन। हाल ही में मुल्तानी मिट्टी का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें इसे दांतों को सफेद करने के लिए उपयोग करते देखा गया। क्या मुल्तानी मिट्टी से दांत सच में साफ होते हैं? आइए जानें सच।
अगर दांतों की सही तरह से देखभाल न की जाए तो उनमें पीलापन आ जाता है। रोजाना दो बार ब्रश न करने वालों में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है। इसके अलावा, ज्यादा धूम्रपान करने या अक्सर चाय-कॉफी पीने से भी दांतों में पीलापन आ सकता है। कभी-कभी दांतों में प्लाक जमा होने से भी यह समस्या होती है। क्या मुल्तानी मिट्टी से दांत का यह पीलापन दूर किया जा सकता है?
मुल्तानी मिट्टी दांतों की देखभाल नहीं करती। यह दांतों का पीलापन दूर नहीं कर सकती। इसका दांतों की देखभाल में कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। यह मुख्यतः त्वचा की देखभाल में इस्तेमाल होती है। डेंटल हाइजीन बनाए रखने में यह कारगर नहीं है। यह एनामेल को भी नहीं ब्लीच करती। उल्टा, लगातार मुल्तानी मिट्टी से दांतों की सफाई करने पर एनामेल खराब हो सकता है। बैक्टीरिया भी दांतों में घर कर सकते हैं। इसलिए दांतों पर मुल्तानी मिट्टी का उपयोग करने से नुकसान ही अधिक होगा।
दांतों की चमक बनाए रखने के लिए कई लोग घरेलू नुस्खों का सहारा लेते हैं। इस मामले में नमक, नारियल तेल, बेकिंग सोडा या नींबू के छिलके जैसे पदार्थ इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन ये भी केवल अस्थायी परिणाम देते हैं। दांतों की सफेदी लंबे समय तक नहीं टिकती। कोई भी घरेलू नुस्खा जल्दी और स्थायी परिणाम नहीं देता। आप हाइड्रॉक्सीअपाटाइट और हाइड्रोजन पेरॉक्साइड जैसे पदार्थों का इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन इसके लिए डॉक्टर की सलाह जरूरी है। रोजाना दांतों की देखभाल न करने पर सफेदी बनाए रखना मुश्किल है।