कोलकाताः पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में चुनाव आयोग ने निगरानी व्यवस्था को और मजबूत कर दिया है। मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू होते ही नकदी, शराब और अन्य प्रलोभनों के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई की जा रही है, ताकि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष बनी रहे।
22 मार्च तक विभिन्न एजेंसियों ने राज्यभर में कुल 181.31 करोड़ रुपये की सामग्री जब्त की है। इसमें नकदी, शराब, नशीले पदार्थ और अन्य वस्तुएं शामिल हैं। जब्त नकदी की राशि 2.82 करोड़ रुपये है। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई मतदाताओं को प्रभावित करने के प्रयासों को रोकने के लिए की जा रही है।
हाल के दिनों में कूचबिहार से भी नशीले पदार्थों की बड़ी खेप पकड़ी गई है, जिसमें 5.8 किलो नशीले पदार्थ और 2.7 किलो अन्य मादक सामग्री शामिल है।
चुनाव आयोग ने राज्य के सभी 294 विधानसभा क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों ने बताया कि बिना अनुमति लगाए गए राजनीतिक विज्ञापनों को हटाने के लिए भी बड़े स्तर पर अभियान चलाया गया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय के अनुसार, राज्य के सभी जिलों में सार्वजनिक और निजी संपत्तियों से पोस्टर, बैनर और अन्य दाग-धब्बे हटाए गए हैं।
एक वरिष्ठ चुनाव अधिकारी ने कहा कि पूरे राज्य में कड़ी निगरानी रखी जा रही है, ताकि मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का पूरी तरह पालन हो सके। शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई के लिए 1,800 से अधिक फ्लाइंग स्क्वॉड टीमें और 2,200 से ज्यादा स्टैटिक सर्विलांस टीमें तैनात की गई हैं। ये टीमें अवैध नकदी और अन्य सामग्री के परिवहन पर नजर रख रही हैं।
राज्य में मतदान 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होगा, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कोलकाता पुलिस और केंद्रीय बल भी सक्रिय हैं।
इसके अलावा, आपराधिक धमकी और मतदाताओं को डराने-धमकाने से जुड़े मामलों में पुलिस ने गिरफ्तारियां की हैं। सख्त निगरानी के दौरान बिना लाइसेंस वाले हथियार और विस्फोटक भी जब्त किए गए हैं।
संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है और मतदाताओं को डराने-धमकाने के मामलों में सख्त कार्रवाई की जा रही है। चुनाव आयोग ने साफ किया है कि चुनाव के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी या नियमों के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उद्देश्य यह है कि हर मतदाता बिना किसी दबाव या प्रलोभन के अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सके।