पश्चिम बंगाल के मतदाता सूची में 'विचाराधीन' यानी 'अंडर एज्यूडिकेशन' सूची में मौजूद मतदाताओं के नामों की पहली सप्लिमेंट्री सूची आज शाम को चुनाव आयोग जारी करने वाला है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि जिन लोगों का नाम इस सूची में नहीं होगा क्या वे वोट दे सकेंगे?
आशंका जतायी जा रही है कि मताधिकार के मुद्दे पर हंगामा और विरोध-प्रदर्शन हो सकता है। वहीं दूसरी ओर चुनाव आयोग बार-बार इस बात को सुनिश्चित करने पर जोर दे रहा है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर किसी प्रकार की हिंसा या मौत जैसी घटनाएं न घटे।
इसलिए पुलिस प्रशासन पहले से ही सतर्क हो गयी है। मिली जानकारी के अनुसार सप्लिमेंट्री सूची जारी होने से एक दिन पहले (रविवार) को कोलकाता के पुलिस कमिश्नर अजय नंद, विधाननगर के पुलिस कमिश्नर मुरलीधर शर्मा और अन्य जिलों के पुलिस अधिकारियों ने अपने-अपने इलाके की परिस्थिति का जायजा लिया। चुनाव के दौरान कानून व्यवस्था को कैसे नियंत्रित की जाए, कमिश्नर ने इस बाबत निचले स्तर के पुलिस कर्मियों का लक्ष्य निर्धारित कर दिया है।
भांगड़ थाना में बैठक के दौरान सीपी अजय नंद ने कहा कि केंद्रीय बल के जवानों को रूट मार्च करवाने के लिए गांव के आखिरी घर तक ले जाएं। कहीं से भी छप्पा वोट या बूथ जैमिंग की शिकायत मिलने पर तुरंत आवश्यक कदम उठाएं। कोई भी मतदाताओं को डरा या धमका न सकें, इस बात का भी ख्याल रखें।
इसके साथ ही केंद्रीय बल के जवानों के साथ उचित व्यवहार और जवानों को इलाके के प्रत्येक घर से परिचित करवाने की हिदायत भी दी। इसके बाद सीपी हेयर स्ट्रीट थाना और बऊबाजार थाना गए। चुनाव के दिन इस इलाके पर विशेष रूप से निगरानी करने का निर्देश उन्होंने पुलिस अधिकारियों को दिया।
दूसरी ओर बारुईपुर, सोनारपुर और नरेंद्रपुर थाना के अधिकारियों के साथ डीआईजी (प्रेसीडेंसी रेंज) कंकड़ प्रसाद बारुई ने बैठक की। बारुईपुर के एसपी शुभेंदु कुमार ने भी थानों के ओसी के साथ बैठक की। केंद्रीय बल के जवानों के रूट मार्च के अलावा मतदाताओं के साथ हमेशा खड़े रहने का संदेश दिया।
विधाननगर पुलिस कमिश्नरेट के सीपी मुरलीधर शर्मा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि चुनाव आयोग के 6 ऑब्जेक्टिव हैं, जिसमें पहला है हिंसा को रोकना। हम उसी तरह सबसे अधिक ध्यान दे रहे हैं। मतदान के दिन प्रत्येक वोटर बूथ तक पहुंच सकें इसे सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।