श्रीनगर: पश्चिम एशिया का युद्ध चौथे सप्ताह में पहुंच चुका है। जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, युद्ध कम होने के कोई संकेत नहीं हैं बल्कि तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। रविवार रात से इजरायल ने ईरान के कई शहरों पर हमला शुरू कर दिया हैं। चार सप्ताह के इस युद्ध में ईरान में रहने वाले कई शिया मुस्लिम नागरिकों की मौत हो चुकी है। कई लोग बेघर हो गए हैं। जीवन-यापन का एकमात्र सहारा मवेशी भी नष्ट हो गए हैं। इस स्थिति में ईरान के शिया मुसलमानों के समर्थन में भारत के कश्मीर के शिया समुदाय के लोग आगे आए हैं। वे ईरान के लिए राहत भेजने हेतु चंदा जुटा रहे हैं।
सिर्फ पैसे ही नहीं बल्कि सोना-चांदी और तांबे जैसी कीमती धातुओं की वस्तुएं भी दान की जा रही हैं। समाचार एजेंसी एएनआई और द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईद के अगले दिन से बडगाम, बारामुल्ला सहित कई शिया बहुल इलाकों में दान संग्रह शुरू हो गया है। युवा घर-घर जाकर चंदा इकट्ठा कर रहे हैं। नकद, सोना-चांदी के गहने और यहां तक कि तांबे की वस्तुएं भी स्वीकार की जा रही हैं।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, एक कश्मीरी महिला ने अपने सभी गहने दान कर दिए, जो उनके पति की आखिरी निशानी थी। कई जगहों पर लोग पैसे या गहनों के बजाय मवेशी भी दान कर रहे हैं। कुछ इलाकों में मस्जिदों के माध्यम से भी यह अभियान चल रहा है। इस मानवीय पहल में नाबालिग भी शामिल हो रहे हैं, जो ईद पर मिले उपहार और अपनी बचत तक दान कर रहे हैं। इस पहल में बडगाम के विधायक मुंताजिर मेहदी भी आगे आए हैं। उन्होंने घोषणा की कि वह अपने एक महीने का वेतन दान करेंगे। उनके शब्दों में, मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं है। यह दान ईरान का दूतावास के माध्यम से भेजा जा रहा है। भारतीय शिया मुसलमानों की इस पहल से ईरान का दूतावास भावुक हो गया है। एक बयान में कहा गया है कि भारत के लोगों का यह योगदान ईरान कभी नहीं भूलेगा।