इस्लामाबाद: अज्ञात हमलावरों के हाथों लश्कर-ए-तैबा के एक शीर्ष कमांडर बिलाल अरिफ शराफी की हत्या के 24 घंटे बाद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों ने उसके परिवार को जिम्मेदार ठहराया।
रविवार को मुरिदके पुलिस ने दावा किया कि बिलाल की हत्या पारिवारिक विवाद का कारण हो सकता है। पिछले दो वर्षों से पाकिस्तान में अज्ञात हमलावर लगातार एक के बाद एक जंगी कमांडरों की हत्या कर रहा है। हर मामले में modus operandi एक समान है—मोटरसाइकिल पर आकर प्वॉइंट ब्लैंक रेंज से गोली मारना और तुरंत फरार हो जाना। अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई। पाकिस्तान की पुलिस या किसी एजेंसी की तरफ से किसी मामले में कोई व्याख्या नहीं दी गई। यह पहला मामला है जिसमें कोई दावा सामने आया। ईद के दिन, यानी शनिवार सुबह नमाज के ठीक बाद मुरिदके शहर में बिलाल पर गोली चली।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गोली लगने के बाद बिलाल जमीन पर गिर गया और हमलावर मोटरसाइकिल से उतरकर उस पर हमला कर दिया। अब तक इस तरह के ‘टारगेटेड किलिंग’ में मारने का तरीका सामान्य नहीं था। यह घटना लश्कर-ए-तैबा के मुख्यालय मारकज-ए-तैबा के बेहद नजदीक हुआ। पाक खुफिया सूत्रों का दावा है कि पारिवारिक विवाद के कारण बिलाल की हत्या की गई। पुलिस ने हत्यारों को गिरफ्तार किया है, ऐसा भी दावा किया गया लेकिन आधिकारिक पुष्टि रविवार रात तक नहीं हुई।
हालांकि इस दावे पर संदेह की काफी गुंजाइश है, भारतीय खुफिया सूत्रों के अनुसार, पारिवारिक विवाद की बात कही जा रही है लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि विवाद किस विषय पर था। इसके अलावा, बिलाल के बारे में भारतीय खुफिया एजेंसियों के पास जो जानकारी है, उसके अनुसार पारिवारिक विवाद की संभावना पर ही सवाल उठ रहा हैं। खुफिया सूत्रों के अनुसार, बिलाल लंबे समय से अपने परिवार के संपर्क में नहीं था। 2005 में लश्कर में शामिल होने के बाद बिलाल मुख्य रूप से मारकज-ए-तैबा में रहता था। मारकज के अंदर वरिष्ठ कमांडरों के लिए ‘तैबा कॉलोनी’ बनाया गया था और वहीं बिलाल अन्य शीर्ष कमांडरों के साथ रहता था।
बिलाल लश्कर में शामिल होने के बाद ट्रेनिंग पूरी करने के बाद मुख्यतः फंड जुटाने के काम में लगा था। इसके बाद उन्हें धीरे-धीरे रिक्रूटमेंट में लगाया गया। खुफिया सूत्रों के अनुसार, बिलाल का अंतिम काम जिहाद पर मैनूपुलेट करके लोगों को संगठन में भर्ती कराना था। इसलिए खुफिया सूत्रों का मानना है कि जिस व्यक्ति का अपने परिवार से संबंध कमजोर था, वह पारिवारिक विवाद में कैसे शामिल हो सकता है। भारतीय खुफिया एजेंसियों का मानना है कि लगातार ‘टारगेटेड किलिंग’ में मार दिए जाने के बाद ही पाक खुफिया एजेंसियों ने पारिवारिक विवाद का सिद्धांत पेश किया।