कोलंबोः पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण दुनिया भर में तेल की सप्लाई प्रभावित हो गई है। खास तौर पर होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद होने से तेल की आवाजाही में दिक्कत आई है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा हो गया और इसका असर श्रीलंका पर भी पड़ा, जिसके चलते सरकार को ईंधन के दाम बढ़ाने पड़े। श्रीलंका पहले ही 2022 में गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर चुका है और अब ईंधन की कीमतें फिर उसी स्तर के करीब पहुंच रही हैं।
कीमतों में कितना बढ़ोतरी हुई
श्रीलंका में ऑटो डीज़ल, सुपर डीज़ल और पेट्रोल की कीमतों में करीब 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है, जबकि केरोसिन के दाम लगभग 31 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। यह मार्च महीने में तीसरी बार और एक हफ्ते के अंदर दूसरी बार कीमतों में इजाफा है।
इसका असर क्या होगा
ईंधन महंगा होने से देश में महंगाई बढ़ने की आशंका है, जो 5 से 8 प्रतिशत तक जा सकती है। रोजमर्रा की चीज़ों की कीमतें बढ़ सकती हैं और आम लोगों की जेब पर असर पड़ेगा।
परिवहन पर बड़ा असर
प्राइवेट बस ऑपरेटरों ने चेतावनी दी है कि अगर किराया नहीं बढ़ाया गया तो उनकी 90 प्रतिशत बसें बंद हो सकती हैं। उन्होंने कम से कम 15 प्रतिशत किराया बढ़ाने की मांग की है और ऐसा न होने पर हड़ताल की भी बात कही है। ऑटो और थ्री-व्हीलर चालकों पर भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है।
सरकार की स्थिति
सरकार का कहना है कि वह अभी भी ईंधन पर सब्सिडी दे रही है और अगर कीमतें नहीं बढ़ाई जातीं तो उस पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे ईंधन और बिजली का उपयोग सोच-समझकर करें और अनावश्यक खपत से बचें।