केदारनाथ (उत्तराखंड) : लगातार हो रही भारी बर्फबारी के कारण केदारनाथ धाम पूरी तरह बर्फ की मोटी परत से ढक गया है। करीब तीन से चार फीट तक जमी बर्फ ने पूरे क्षेत्र और आसपास के इलाकों को सफेद चादर में बदल दिया है।
मंदिर समिति के अनुसार विश्व प्रसिद्ध ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग केदारनाथ मंदिर और पूरी केदार घाटी बर्फ से ढकी हुई है, जिससे यहां का दृश्य बेहद आकर्षक और आध्यात्मिक महसूस हो रहा है। कठोर ठंड और शून्य से नीचे तापमान के बावजूद उत्तराखंड पुलिस और आईटीबीपी के जवान पूरी सतर्कता के साथ तैनात हैं। वे लगातार गश्त कर रहे हैं ताकि मंदिर परिसर की सुरक्षा और पवित्रता बनी रहे।
बर्फबारी के बीच सुरक्षा बलों ने मजबूत सुरक्षा व्यवस्था कायम रखी है। जवान अपने रहने के स्थानों और बैरकों के आसपास जमी बर्फ को खुद ही साफ कर रहे हैं, ताकि उनकी ड्यूटी प्रभावित न हो।
इधर, उत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार नए कदम उठा रही है। राज्य में धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ एडवेंचर टूरिज्म को भी विकसित किया जा रहा है और बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। सरकारी सूत्रों के अनुसार यात्रियों की सुविधा के लिए बड़े स्तर पर रोपवे परियोजनाओं पर काम शुरू किया गया है। सोनप्रयाग से केदारनाथ तक 12.9 किलोमीटर लंबा रोपवे करीब 4,081 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा। वहीं, गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक 12.4 किलोमीटर का रोपवे 2,730 करोड़ रुपये में प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद श्रद्धालुओं की यात्रा आसान होगी और समय भी कम लगेगा।
राज्य में सालभर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शीतकालीन यात्रा की शुरुआत भी की गई है। इसी पहल के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले मां गंगा के शीतकालीन निवास स्थल मुखवा का दौरा कर चुके हैं।
कुमाऊं क्षेत्र में मानसखंड मंदिर माला मिशन के तहत 48 मंदिरों को जोड़कर धार्मिक सर्किट विकसित किया जा रहा है, जिससे आध्यात्मिक पर्यटन को और बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में मास्टर प्लान के तहत तेजी से विकास कार्य चल रहे हैं। बद्रीनाथ धाम को लगभग 255 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के जरिए एक आधुनिक आध्यात्मिक हिल टाउन के रूप में विकसित किया जा रहा है।