नई दिल्लीः पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से फोन पर बातचीत की। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमले जारी हैं और इसके जवाब में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग बंद कर दिया है।
पिछले 10 दिनों में दोनों नेताओं के बीच यह दूसरी बातचीत है, जो इस संकट में भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता को दर्शाती है। प्रधानमंत्री मोदी ने ईद और नौरोज की शुभकामनाएं देते हुए क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि की कामना की।
हमलों और आपूर्ति पर चिंता
प्रधानमंत्री मोदी ने महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि इस तरह के हमले न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को कमजोर करते हैं, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर भी गंभीर असर डालते हैं। उन्होंने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और फारस की खाड़ी में निर्बाध नौवहन पर जोर दिया। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख केंद्र है, जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और बड़ी मात्रा में गैस गुजरती है।
ईरान का प्रस्ताव
ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने पश्चिम एशियाई देशों के बीच एक क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा बनाने का प्रस्ताव रखा, जो बाहरी हस्तक्षेप के बिना शांति सुनिश्चित कर सके। उन्होंने भारत से, जो इस समय ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है, अपनी स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति का उपयोग कर अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई को रोकने में भूमिका निभाने की अपील की।
ईरान ने यह भी कहा कि उस पर लगाए जा रहे परमाणु हथियारों के आरोप गलत हैं और उसके शीर्ष नेतृत्व पहले ही ऐसे हथियारों का विरोध कर चुका है।
ऊर्जा संकट और वैश्विक असर
ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को अवरुद्ध किए जाने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर पड़ा है। मार्च 2026 तक ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जो हाल के महीनों में 40 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाती हैं।
भारत जैसे देशों के लिए, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करते हैं, यह स्थिति गंभीर चुनौती बन सकती है। इसके साथ ही आपूर्ति में बाधा से महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका भी है।
बढ़ता संघर्ष और मानवीय संकट
पश्चिम एशिया में संघर्ष फरवरी 2026 के अंत से तेज हुआ है, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने सैन्य कार्रवाई और रणनीतिक कदम उठाए।
इसी बीच, मिनाब में एक स्कूल पर हुए हमले में 168 स्कूली बच्चों की मौत की खबर ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। ईरान ने इस हमले के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है।
भारत की संतुलित कूटनीति और आगे का रास्ता
भारत लगातार संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान पर जोर दे रहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर भी ईरान के अपने समकक्ष से बातचीत कर चुके हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने हाल में ओमान, जॉर्डन, फ्रांस और मलेशिया के नेताओं से भी चर्चा की है। भारत का स्पष्ट रुख है कि युद्ध किसी के हित में नहीं है और सभी पक्षों को जल्द से जल्द शांति की दिशा में कदम बढ़ाने चाहिए।
इस संकट के बीच भारत की भूमिका एक संतुलित और स्वतंत्र वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रही है, जो न केवल अपने हितों की रक्षा कर रहा है बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता में भी योगदान देने की कोशिश कर रहा है।