क्वेटा (पाकिस्तान): पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में एक नया विवाद सामने आया है। क्वेटा में अधिकारियों ने एक ऐसी महिला को प्रेस कॉन्फ्रेंस में पेश किया, जो पहले लापता बताई जा रही थी। अब उसे आत्मघाती हमले की संदिग्ध बताने से सरकार की भूमिका और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। लापता महिला को अचानक आतंकी बताने से विवाद और गहरा गया है और अब इस पर देश-विदेश में चर्चा तेज हो गई है।
कौन है यह महिला, क्या लगाए गए आरोप
रिपोर्ट के मुताबिक इस महिला की पहचान फरजाना बलोच उर्फ फरजाना ज़ेहरी के रूप में हुई है। अधिकारियों का दावा है कि उसका संबंध आतंकी नेटवर्क से था। यह भी कहा गया कि वह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के एक कमांडर के संपर्क में थी और उसे आत्मघाती हमले के लिए तैयार किया जा रहा था। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
पहले से थी लापता, यहीं से बढ़ा विवाद
इस मामले को लेकर विवाद इसलिए और बढ़ गया क्योंकि फरजाना पहले से लापता बताई जा रही थी। जानकारी के अनुसार 1 दिसंबर 2025 को वह खुजदार में अस्पताल से लौटते समय गायब हो गई थी। उसके परिवार ने आरोप लगाया था कि उसे पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने हिरासत में लिया था। मानवाधिकार संगठनों ने भी इस मामले को जबरन गायब किए जाने के कई मामलों में से एक बताया था।
सरकार का दावा और विरोध
बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने कहा कि आतंकी संगठन महिलाओं का इस्तेमाल हमलों के लिए कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि फरजाना कुछ लोगों के संपर्क में थी, जो बलूच एकजुटता समिति से जुड़े हैं। लेकिन बलूच नेताओं और मानवाधिकार संगठनों ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि सरकार असहमति की आवाज़ को दबाने के लिए ऐसे आरोप लगा रही है।
मानवाधिकार संगठनों की कड़ी प्रतिक्रिया
डॉ. सबीहा बलोच ने इन आरोपों को मीडिया ट्रायल बताया और कहा कि फरजाना को जबरन गायब किया गया था। उनका आरोप है कि पाकिस्तान में जबरन गायब करना एक दबाव बनाने का तरीका बन चुका है। वहीं, बलोच नेशनल मूवमेंट के अध्यक्ष डॉ. नसीम बलोच ने भी इस घटना की निंदा की और कहा कि हिरासत में लिए गए लोगों पर अक्सर बयान देने का दबाव डाला जाता है।