कोलकाताः पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने अपने चुनावी अभियान की व्यापक रूपरेखा तैयार कर ली है। पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी जहां उत्तर बंगाल से प्रचार की कमान संभालेंगी, वहीं पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी दक्षिण बंगाल में मोर्चा संभालते नजर आएंगे। इस रणनीति के जरिए पार्टी राज्य के दोनों हिस्सों में एक साथ चुनावी माहौल को धार देने की तैयारी में है।
कोलकाता से रणनीतिक शुरुआत
चुनावी अभियान की शुरुआत ममता बनर्जी अपने “घर” कोलकाता से करेंगी। रविवार को चेतला स्थित अहींद्र मंच में आयोजित कार्यकर्ता बैठक को काफी अहम माना जा रहा है। इस बैठक में कोलकाता के मेयर फिरहाद हाकिम, भवानीपुर क्षेत्र के पार्षदों के साथ-साथ संगठन के कई प्रमुख नेता मौजूद रहेंगे।
सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में ममता बनर्जी कार्यकर्ताओं को चुनावी दिशा और रणनीति का स्पष्ट संदेश देंगी। खासतौर पर विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ राजनीतिक रणनीति को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है।
उत्तर बंगाल से ममता का आक्रामक अभियान
तृणमूल नेतृत्व का मानना है कि उत्तर बंगाल चुनावी दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जहां पिछले चुनावों में कड़ी टक्कर देखने को मिली थी। इसी को ध्यान में रखते हुए ममता बनर्जी 25 मार्च से कूचबिहार और अलीपुरद्वार में जनसभाओं के जरिए अपने प्रचार अभियान की शुरुआत कर सकती हैं। इसके अगले दिन चालसा में उनकी सभा प्रस्तावित है।
इन सभाओं के जरिए ममता बनर्जी सीधे जनता से संवाद स्थापित कर राज्य सरकार की उपलब्धियों और विपक्ष की नीतियों पर अपनी बात रखेंगी।
दक्षिण बंगाल में अभिषेक की सक्रियता
दूसरी ओर, अभिषेक बनर्जी 24 मार्च से दक्षिण बंगाल में चुनावी अभियान का आगाज करेंगे। उनकी पहली सभा पाथरप्रतिमा में होगी, जिसके बाद 25 मार्च को पश्चिम मेदिनीपुर के दासपुर, केशियाड़ी और नारायणगढ़ में लगातार जनसभाएं होंगी।
अभिषेक का फोकस उन क्षेत्रों पर रहेगा, जहां पार्टी को संगठन मजबूत करने और मतदाताओं के बीच सीधा संपर्क बढ़ाने की जरूरत है।
नंदीग्राम पर खास नजर, रणनीति होगी तेज
नंदीग्राम सीट इस चुनाव में एक बार फिर राजनीतिक केंद्र बनती नजर आ रही है। यहां से विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी चुनाव मैदान में हैं, ऐसे में तृणमूल इस सीट को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।
अभिषेक बनर्जी नंदीग्राम में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे, जहां जमीनी स्तर की तैयारियों और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। यह बैठक इस सीट पर पार्टी की रणनीतिक प्राथमिकता को दर्शाती है।
दो मोर्चों पर एक साथ अभियान, संगठन को मजबूती
तृणमूल की यह रणनीति स्पष्ट संकेत देती है कि पार्टी इस बार चुनाव में कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहती। उत्तर बंगाल में ममता बनर्जी का अनुभव और जनाधार, जबकि दक्षिण बंगाल में अभिषेक बनर्जी की सक्रियता-दोनों मिलकर पार्टी के चुनावी अभियान को गति देने का काम करेंगे।
इस दोहरी रणनीति के जरिए तृणमूल पूरे राज्य में संगठन को सक्रिय करने, कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने और मतदाताओं तक सीधे पहुंचने की कोशिश कर रही है।
चुनावी माहौल होगा और तेज
24 और 25 मार्च से शुरू हो रहा यह अभियान राज्य में चुनावी माहौल को और गरमा देगा। आने वाले दिनों में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच प्रचार की रफ्तार और तेज होने की उम्मीद है।
तृणमूल कांग्रेस इस रणनीति के जरिए यह संदेश देना चाहती है कि वह चुनावी मैदान में पूरी ताकत के साथ उतर चुकी है और हर सीट पर मजबूत चुनौती पेश करने के लिए तैयार है।