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मध्य पूर्व में युद्ध चौथे सप्ताह में: ईरान ने इजरायल के न्यूक्लियर सेंटर को निशाना बनाया

ईरानी मिसाइलें लंबी दूरी तक पहुंच सकती हैं, नतांज में हमले से रेडियोधर्मी रिसाव नहीं।

By श्वेता सिंह

Mar 22, 2026 01:13 IST

तेहरानः मध्य पूर्व में युद्ध अब अपने चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। अमेरिका और इजरायल द्वारा फरवरी 28, 2026 को शुरू किए गए हमलों के जवाब में ईरान ने विभिन्न लक्ष्यों पर मिसाइल और हवाई हमले तेज कर दिए हैं। 21 मार्च 2026 तक की स्थिति के अनुसार, युद्ध का असर न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी देखा जा रहा है।

ईरान का दीगो गार्सिया एयर बेस पर हमला

ईरान ने ब्रिटेन और अमेरिका के संयुक्त सैन्य अड्डे दीगो गार्सिया (हिंद महासागर में) पर मिसाइल हमला किया। हालांकि यह हमला असफल रहा और मिसाइलें लक्ष्य तक नहीं पहुंचीं। ब्रिटेन ने इसे ईरान की "लापरवाह कार्रवाई" बताया। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का इस्तेमाल किया, जिसकी रेंज 4,000 किलोमीटर से अधिक बताई जा रही है। इससे पहले ईरान दावा करता था कि उसकी मिसाइलें 2,000 किलोमीटर तक ही मार सकती हैं। इजरायली सेना प्रमुख ने कहा कि ऐसी मिसाइलें यूरोप के बड़े शहरों तक पहुंच सकती हैं।

नतांज न्यूक्लियर सेंटर पर फिर हमला

ईरान की मुख्य यूरेनियम संवर्धन सुविधा नतांज पर भी एक बार फिर हवाई हमला हुआ। ईरानी मीडिया ने बताया कि हमले से कोई रेडियोधर्मी रिसाव नहीं हुआ। इस केंद्र को पहले भी युद्ध के पहले सप्ताह में निशाना बनाया गया था। इजरायल ने हमले की जिम्मेदारी से इनकार किया, जबकि पेंटागन ने कोई टिप्पणी नहीं की। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने हमले की जानकारी ली और जांच शुरू की। ईरान का दावा है कि लगभग 440 किलो संवर्धित यूरेनियम अन्य सुरक्षित स्थानों पर रखा गया है। रूस ने चेतावनी दी है कि ऐसे हमले पूरे क्षेत्र में बड़े नुकसान का खतरा पैदा कर सकते हैं।

युद्ध से अब तक हुआ जान-माल का नुकसान

युद्ध के दौरान ईरान में 1,300 से अधिक लोग मारे गए हैं। इजरायल में ईरानी मिसाइलों से 15 लोगों की मौत हुई और वेस्ट बैंक में 4 लोग मारे गए। अमेरिकी सैनिकों में 13 से अधिक मौतें हुई हैं, जबकि खाड़ी देशों में दर्जनों नागरिक हताहत हुए हैं। लेबनान में इजरायल-हिजबुल्लाह संघर्ष में 1,000 से अधिक लोग मारे गए और दस लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए।

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को धमकी दी है, जिससे वैश्विक तेल कीमतों में तेजी आई है। ब्रेंट क्रूड $115 प्रति बैरल तक पहुंच गया है। अमेरिका ने मध्य पूर्व में 2,500 अतिरिक्त मरीन और तीन एम्फीबियस जहाज तैनात किए हैं। ट्रंप प्रशासन ने कुछ ईरानी तेल पर अस्थायी प्रतिबंध हटा दिए हैं, लेकिन उत्पादन में कोई वृद्धि नहीं हुई।

क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक असर

ईरान ने इजरायल के डिमोना न्यूक्लियर सेंटर पर हमला किया, जिससे कुछ लोग घायल हुए। खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब और दुबई में ड्रोन और मिसाइल हमले हुए, जिनमें से कई को रोक लिया गया। लेबनान में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच झड़पें जारी हैं।

युद्ध के चलते वैश्विक खाद्य और ईंधन कीमतें बढ़ रही हैं और अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ रहा है। फिलहाल युद्ध के थमने के कोई संकेत नहीं हैं और सभी पक्षों में तनाव जारी है।

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