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चुनावी विज्ञापनों पर कड़ी नजर, अब हर राजनीतिक प्रचार के लिए पहले मंजूरी लेनी होगी

निर्वाचन आयोग का सख्त निर्देश, सोशल मीडिया से टीवी तक बिना प्रमाणीकरण कोई विज्ञापन नहीं। फेक न्यूज पर रोक के लिए नई व्यवस्था लागू।

By श्वेता सिंह

Mar 21, 2026 00:19 IST

नई दिल्लीः आगामी विधानसभा चुनावों और उपचुनावों से पहले भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने राजनीतिक प्रचार-प्रसार को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि अब किसी भी राजनीतिक दल, उम्मीदवार या संगठन को सोशल मीडिया, इंटरनेट, टीवी, रेडियो, ई-पेपर या बल्क मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन जारी करने से पहले अनिवार्य रूप से पूर्व प्रमाणीकरण लेना होगा।

प्रमाणीकरण अनिवार्य, बिना मंजूरी नहीं चलेगा प्रचार

यह प्रमाणीकरण मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमिटी (MCMC) द्वारा किया जाएगा। आयोग के अनुसार, बिना इस मंजूरी के कोई भी राजनीतिक विज्ञापन प्रसारित नहीं किया जा सकेगा। इस कदम का उद्देश्य चुनाव के दौरान फैलने वाली गलत सूचना, भ्रामक प्रचार और फेक न्यूज पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।

आवेदन प्रक्रिया और अपील का विकल्प

निर्देश के तहत राज्य स्तर पर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को राज्य स्तरीय एमसीएमसी के पास आवेदन करना होगा, जबकि व्यक्तिगत उम्मीदवारों और अन्य संबंधित व्यक्तियों को जिला स्तरीय समिति से अनुमति लेनी होगी। आवेदन तय समय सीमा के भीतर जमा करना अनिवार्य होगा। यदि किसी उम्मीदवार या दल को एमसीएमसी के निर्णय पर आपत्ति होती है, तो वे राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की अध्यक्षता वाली अपील समिति में अपील कर सकते हैं। एमसीएमसी की भूमिका केवल विज्ञापनों के प्रमाणीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह चुनाव के दौरान संदिग्ध पेड न्यूज की निगरानी और आवश्यक कार्रवाई भी करेगी। इसके जरिए आयोग चुनावी माहौल को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

सोशल मीडिया खातों का खुलासा जरूरी

चुनाव आयोग (ECI) ने उम्मीदवारों के लिए पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से एक और अहम निर्देश दिया है। अब सभी उम्मीदवारों को नामांकन के साथ अपने आधिकारिक और सत्यापित सोशल मीडिया खातों-जैसे फेसबुक, एक्स और इंस्टाग्राम की जानकारी शपथ-पत्र में देना अनिवार्य होगा। इसका मकसद फर्जी अकाउंट्स के जरिए होने वाले दुरुपयोग पर रोक लगाना है।

खर्च का पूरा हिसाब देना होगा

चुनाव के बाद राजनीतिक दलों को अपने खर्च का विस्तृत ब्यौरा भी देना होगा। विधानसभा चुनाव समाप्त होने के 75 दिनों के भीतर उन्हें आयोग को यह जानकारी सौंपनी होगी, जिसमें इंटरनेट और सोशल मीडिया पर किए गए सभी खर्च शामिल होंगे। इसमें विज्ञापनों पर खर्च, कंटेंट तैयार करने की लागत और सोशल मीडिया संचालन से जुड़े खर्च भी शामिल किए जाएंगे। यह प्रावधान जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप लागू किया जा रहा है।

फेक न्यूज पर सख्ती, उच्चस्तरीय बैठक

फेक न्यूज और दुष्प्रचार से निपटने के लिए आयोग ने 19 मार्च 2026 को सभी चुनावी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, पुलिस और आईटी नोडल अधिकारियों तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक भी की। इसमें डिजिटल माध्यमों पर निगरानी को और सख्त बनाने तथा त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

कहां-कहां और कब होगा मतदान

इस वर्ष जिन राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, वहां कुल लगभग 17.4 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। असम, केरल और पुदुचेरी में 9 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि तमिलनाडु में 23 अप्रैल और पश्चिम बंगाल में 23 व 29 अप्रैल को दो चरणों में वोट डाले जाएंगे। मतगणना 4 मई को होगी।

निर्वाचन आयोग का यह कदम चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और निष्पक्ष बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जिससे डिजिटल युग में चुनावी आचार संहिता को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।

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