लखनऊ : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के वृंदावन में स्थित बाबा नीम करोली जी के पवित्र समाधि स्थल पर पहुंचकर विधिवत दर्शन और पूजा-अर्चना की। इस दौरान उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी उनके साथ मौजूद रहीं। जन भवन उत्तर प्रदेश द्वारा सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर दी गई जानकारी के अनुसार राष्ट्रपति और राज्यपाल ने पूरे श्रद्धा भाव से पूजा संपन्न की।
वृंदावन प्रवास के दौरान राष्ट्रपति मुर्मु ने पूज्य संत प्रेमानंद महाराज से उनके श्री हित राधा केली कुंज आश्रम में मुलाकात की और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त किया। यह यात्रा उनके हालिया अयोध्या दौरे के बाद हुई जहां उन्होंने गुरुवार को श्री राम जन्मभूमि मंदिर में रामलला के दर्शन किए थे।
अयोध्या में राष्ट्रपति ने मंदिर परिसर के विभिन्न हिस्सों में जाकर पूजा और आरती में भाग लिया। इसके साथ ही उन्होंने श्री राम यंत्र स्थापना और पूजन भी किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि अयोध्या भगवान श्रीराम की जन्मभूमि की पवित्र धूल को स्पर्श करना उनके लिए अत्यंत सौभाग्य की बात है। उन्होंने इसे अपने जीवन के सबसे पावन क्षणों में से एक बताया।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन जो संवत्सर 2083 की शुरुआत और नवरात्रि का पहला दिन है अयोध्या में उपस्थित होना विशेष महत्व रखता है। उन्होंने श्री राम जन्मभूमि मंदिर के भूमि पूजन, रामलला की प्राण प्रतिष्ठा, राम दरबार के उद्घाटन और मंदिर के शिखर पर ध्वज फहराने जैसी घटनाओं को देश के इतिहास और संस्कृति के स्वर्णिम अध्याय बताया।
राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने संबोधन में कहा कि भारत एक समावेशी समाज और विकसित राष्ट्र की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रभु श्रीराम के आशीर्वाद से वर्ष 2047 तक या उससे पहले ही देश इन लक्ष्यों को प्राप्त कर लेगा।
उन्होंने रामराज्य की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह एक ऐसी व्यवस्था है, जहां कोई भी व्यक्ति दुखी, गरीब या वंचित नहीं होता और सभी के पास नैतिक मूल्यों का पालन करने की क्षमता होती है।