नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को राजधानी में एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में पेट्रोलियम, कच्चा तेल, गैस, बिजली और उर्वरक जैसे अहम क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा की गई।
बैठक में इस बात पर खास जोर दिया गया कि देशभर में जरूरी संसाधनों की आपूर्ति बिना रुकावट जारी रहे, लॉजिस्टिक्स सुचारु रहें और वितरण प्रणाली प्रभावी तरीके से काम करे।
पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष अब चौथे सप्ताह में पहुंच चुका है, जिससे होर्मुज़ जलडमरूमध्य के जरिए होने वाले व्यापार पर असर पड़ा है। 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा संयुक्त सैन्य कार्रवाई में ईरान के 86 वर्षीय सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए।
इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में अमेरिका और इज़राइल से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे समुद्री मार्गों पर असर पड़ा और वैश्विक ऊर्जा बाजार तथा आर्थिक स्थिरता प्रभावित हुई।
संघर्ष के चलते औद्योगिक डीज़ल की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो 87.67 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 109.59 रुपये प्रति लीटर हो गई है यानी करीब 25 प्रतिशत की वृद्धि।
इसी बीच, अमेरिका के टेक्सास से तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) लेकर एक मालवाहक जहाज़ मंगलुरु स्थित न्यू मैंगलोर पोर्ट पर पहुंचा। शुक्रवार को पोत परिवहन मंत्रालय ने जानकारी दी कि 14 मार्च से 31 मार्च तक न्यू मैंगलोर पोर्ट पर कच्चे तेल और एलपीजी से जुड़े कार्गो शुल्क माफ कर दिए गए हैं। साथ ही यह भी बताया गया कि किसी भी बंदरगाह पर भीड़भाड़ की स्थिति नहीं है।
एक अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में पोत परिवहन मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद भारत के सभी 22 जहाज़ और 611 नाविक सुरक्षित हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 24 घंटों में किसी समुद्री घटना की सूचना नहीं मिली है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। साथ ही, सभी बंदरगाह सामान्य रूप से काम कर रहे हैं और न्यू मैंगलोर पोर्ट द्वारा जारी शुल्क छूट का आदेश 31 मार्च तक लागू रहेगा।