चंडीगढ़ः हरियाणा में हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। भूपिंदर सिंह हुड्डा ने साफ संकेत दिए हैं कि क्रॉस-वोटिंग करने वाले पार्टी नेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान पार्टी लाइन से हटकर मतदान करने वाले पांच लोगों की पहचान की गई है और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएंगे।
क्रॉस-वोटिंग और वोट रद्द होने पर विवाद
हुड्डा ने चुनाव परिणामों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस चुनाव में एक सीट भारतीय जनता पार्टी और एक सीट कांग्रेस के खाते में गई, लेकिन मतदान प्रक्रिया में कई गड़बड़ियां सामने आईं।
उनके मुताबिक, कांग्रेस के तीन वोट रद्द कर दिए गए, जिसे उन्होंने अनुचित करार दिया। साथ ही उन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर पर भी निष्पक्षता न बरतने का आरोप लगाया।
निर्दलीय उम्मीदवार को लेकर उठे सवाल
हुड्डा ने यह भी कहा कि बीजेपी ने आधिकारिक तौर पर उम्मीदवार नहीं उतारा, फिर भी सात विधायकों ने एक निर्दलीय प्रत्याशी को वोट दिया। इससे क्रॉस-वोटिंग के आरोप और गहरे हो गए हैं।
कांग्रेस का आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही और इसमें राजनीतिक दबाव की भूमिका रही।
राज्यपाल को पत्र, चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर आरोप
चुनाव के बाद भूपिंदर सिंह हुड्डा और कांग्रेस विधायक दल (CLP) के सदस्यों ने बंडारू दत्तात्रेय को पत्र लिखकर पूरे मामले की शिकायत की है।
इस पत्र में चुनाव प्रक्रिया को “लोकतंत्र का मजाक” बताया गया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मतदान और मतगणना दोनों ही चरणों में निष्पक्षता से समझौता किया गया।
सत्ता पक्ष पर दबाव और प्रलोभन के आरोप
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने निर्दलीय उम्मीदवार के समर्थन में राजनीतिक दबाव, प्रलोभन और सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल किया।
पार्टी का दावा है कि चुनाव के दौरान हॉर्स-ट्रेडिंग और प्रभाव का इस्तेमाल हुआ, जिससे चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित हुई।
रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका पर सवाल
कांग्रेस ने रिटर्निंग ऑफिसर पंकज अग्रवाल पर भी पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। पार्टी के अनुसार, उनके एजेंटों द्वारा उठाई गई आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया और कुछ वोटों के साथ ऐसा व्यवहार किया गया जिससे भाजपा और निर्दलीय उम्मीदवार को फायदा मिला।
चुनाव का व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि ये राज्यसभा चुनाव 10 राज्यों की 37 सीटों के लिए आयोजित किए गए थे। इनमें से 26 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए, जबकि शेष 11 सीटों पर मतदान हुआ।
हरियाणा विधानसभा की 90 सीटों में भारतीय जनता पार्टी के पास 48 और कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं। इसके बावजूद दूसरा राज्यसभा मुकाबला उस समय विवादों में आ गया जब बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में उतरा।
आगे की रणनीति?
क्रॉस-वोटिंग के आरोपों और चुनाव प्रक्रिया पर उठे सवालों के बीच अब नजर इस बात पर है कि कांग्रेस अपने भीतर क्या कार्रवाई करती है और क्या इस मामले की जांच आगे बढ़ती है। हरियाणा की राजनीति में यह विवाद आने वाले समय में और गहराने के संकेत दे रहा है।