गुवाहाटीः असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने सीमित लेकिन रणनीतिक दांव खेलते हुए 23 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं। पार्टी नेतृत्व, खासकर ममता बनर्जी की अगुवाई में लिया गया यह फैसला साफ संकेत देता है कि टीएमसी फिलहाल सत्ता हासिल करने से ज्यादा राज्य में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने पर ध्यान दे रही है।
पार्टी की वरिष्ठ नेता सुष्मिता देव ने एक इंटरव्यू में कहा कि टीएमसी का मकसद मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल होना नहीं, बल्कि जनता से जुड़े मुद्दों को विधानसभा तक पहुंचाना है।
संतुलित प्रतिनिधित्व के जरिए सियासी संदेश
टीएमसी ने उम्मीदवारों के चयन में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की है। पार्टी ने बाराक वैली में 5 उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि ऊपरी, निचले और मध्य असम के साथ-साथ बोडोलैंड क्षेत्र में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
सुष्मिता देव के मुताबिक, टिकट वितरण में हर जाति, धर्म और भाषा के लोगों को शामिल किया गया है, ताकि एक समावेशी राजनीतिक संदेश दिया जा सके। यह रणनीति राज्य के विविध सामाजिक ढांचे को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
जन मुद्दों पर केंद्रित चुनावी एजेंडा
टीएमसी ने अपने अभियान को बड़े वादों के बजाय सीमित लेकिन असरदार मुद्दों पर केंद्रित किया है। पार्टी 5 से 10 प्रमुख जन सरोकारों को लेकर चुनाव मैदान में उतरी है, जिनमें शामिल हैं:
-स्मार्ट मीटर से उपभोक्ताओं की बढ़ती परेशानियां
-ब्रह्मपुत्र नदी की कटान (एरोजन)
-बिजली की बढ़ती कीमतें
-बाराक वैली में औद्योगिक विकास की कमी
सुष्मिता देव ने स्पष्ट किया कि चाहे पार्टी के 1 विधायक जीतें या 15, ये मुद्दे उनके “न्यूनतम कार्यक्रम” का हिस्सा रहेंगे। पार्टी जल्द ही अपना विस्तृत 10-सूत्रीय एजेंडा भी जारी करने वाली है।
मजबूत सीटों पर खास नजर
हालांकि टीएमसी केवल 23 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, लेकिन पार्टी का दावा है कि इनमें से 10 से 15 सीटों पर उसके उम्मीदवार मजबूत स्थिति में हैं।
चुनावी समीकरण को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने विविध पृष्ठभूमि के उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। उदाहरण के तौर पर, कांग्रेस से हाल ही में जुड़े शर्मन अली अहमद को मंडिया सीट से टिकट दिया गया है, जो स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली माने जाते हैं।
बढ़ता मतदाता आधार, बदलते समीकरण
असम में इस बार लगभग 2.5 करोड़ मतदाता हैं, जो पिछले चुनाव के मुकाबले 6.49% अधिक हैं। मतदाताओं की यह बढ़ती संख्या चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना रही है।
राज्य की 126 सीटों पर एक ही चरण में 9 अप्रैल 2026 को मतदान होगा, जबकि मतगणना 4 मई 2026 को की जाएगी। नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब सभी राजनीतिक दलों ने प्रचार अभियान तेज कर दिया है।
तीसरी ताकत बनने की कोशिश
असम में पारंपरिक रूप से मुकाबला मुख्यतः भाजपा और कांग्रेस के बीच रहा है, लेकिन टीएमसी इस बार खुद को एक वैकल्पिक राजनीतिक ताकत के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है।
पार्टी की रणनीति साफ है-कम सीटों पर फोकस करके बेहतर प्रदर्शन करना और राज्य की राजनीति में अपनी स्थायी मौजूदगी दर्ज कराना।
लंबी पारी की तैयारी में टीएमसी
टीएमसी का यह चुनावी दांव केवल 2026 तक सीमित नहीं दिखता, बल्कि इसे राज्य में दीर्घकालिक राजनीतिक निवेश के तौर पर देखा जा रहा है। जन मुद्दों पर केंद्रित राजनीति और संतुलित उम्मीदवार चयन के जरिए पार्टी असम में धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।