नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत लगातार उच्चस्तरीय कूटनीतिक संपर्क बनाए हुए है। विदेश मंत्रालय ने सोमवार को जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मुद्दे पर कई प्रमुख वैश्विक नेताओं से बातचीत कर रहे हैं, ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम की जा सके।
समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि फरवरी के अंत से बढ़े इस संघर्ष को लेकर लगातार संवाद जारी है और इसका मुख्य उद्देश्य हालात को और बिगड़ने से रोकना है।
उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने ईद और नवरोज़ की शुभकामनाएं देने के साथ-साथ क्षेत्र में शांति और स्थिरता की उम्मीद भी जताई।
जायसवाल के अनुसार प्रधानमंत्री ने बातचीत के दौरान नागरिक ठिकानों पर हो रहे हमलों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की और कहा कि इस तरह की घटनाएं क्षेत्रीय संतुलन को नुकसान पहुंचा सकती हैं। भारत ने ऊर्जा से जुड़े ढांचे पर हो रहे हमलों की भी निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ऐसे हमले न केवल क्षेत्र की स्थिरता के लिए खतरा हैं, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन को भी प्रभावित कर सकते हैं।
ANI की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है। सरकार का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए जरूरी शिपिंग रूट खुले और सुरक्षित रहना बेहद जरूरी है।
इसके अलावा पश्चिम एशिया में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा भी सरकार की प्राथमिकता बनी हुई है। MEA ने बताया कि प्रधानमंत्री ने ईरान द्वारा भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयासों की सराहना की।
गौरतलब है कि ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के चलते स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। खासकर हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर संकट और ऊर्जा ठिकानों पर हमलों ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।