हिंदू धर्म में छठ पूजा को अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र पर्व माना जाता है। यह महापार्व साल में दो बार चैत्र और कार्तिक मास में मनाया जाता है। इस साल चैत्र मास की छठ पूजा का आरंभ 22 मार्च को नहाए खाए के से हो चुका है। वहीं आज दूसरा दिन यानी खरना है, जिसे पूरे श्रद्धा भाव और नियमों के साथ मनाया जाता है। चार दिन के इस खास पर्व में नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य का विशेष महत्व माना जाता है। छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित होती है। इस दौरान भक्त कठिन व्रत रखकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं। आइए जानते हैं चैती छठ 2026 की तिथियां और इससे जुड़े जरूरी नियम।
दूसरा दिन- खरना
आज चैती छठ का दूसरा दिन है, जिसे खरना कहा जाता है। इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रख कर गुड़ की खीर और रोटी का खास प्रसाद तैयार की और शाम को यह प्रसाद भगवान को अर्पित किया। इसके बाद व्रती इसे स्वयं ग्रहण की। साथ ही पूरा परिवार यह महाप्रसाद ग्रहण करता है। इसके बाद से 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत शुरू हो जाता है।
तीसरा दिन- संध्या अर्घ्य
छठ पर्व के तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने की परंपरा है, जिसे संध्या अर्घ्य कहा जाता है। इस अवसर पर व्रती जल में खड़े होकर सूर्य देव की उपासना करते हैं। फल, ठेकुआ और अन्य प्रसाद अर्पित किए जाते हैं। इस साल संध्या अर्घ्य 24 मार्च 2026 को दी जाएगी। पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्यास्त शाम 06:34 बजे होगा।
चौथा दिन- उषा अर्घ्य
छठ पूजा के अंतिम यानी चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने का होता है, जिसे उषा अर्घ्य कहा जाता है। सूर्योदय के समय पूजा कर 36 घंटे के इस कठिन व्रत का समापन किया जाता है। इसके बाद व्रती प्रसाद ग्रहण कर अपना व्रत खोलते हैं। इस बार उषा अर्घ्य 25 मार्च 2026 को दी जाएगी। पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्योदय सुबह 06:20 बजे होगा।
चैती छठ व्रत के नियम
चैती छठ का व्रत काफी कठिन और नियमबद्ध माना जाता है, जिसे पूरी आस्था और शुद्धता के साथ किया जाता है। इस दौरान कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है। घर और आसपास की जगह की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। व्रत के दौरान तन और मन की शुद्धता बनाए रखना जरूरी होता है। साफ कपड़े पहनें और अशुद्धता से दूर रहें।
छठ पूजा में डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके बिना व्रत अधूरा माना जाता है। इस व्रत में संयम का पालन जरूरी है। क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए। इस तरह श्रद्धा और नियमों के साथ किया गया छठ व्रत जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लाने वाला माना जाता है।