19 मार्च से सनातन परंपरा का पावन पर्व नवरात्र आरंभ हो रहा है, जो आस्था, साधना और आत्मशुद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसी दिन से हिंदू नववर्ष, नवसंवत्सर 2083 का भी शुभारंभ होगा। श्रद्धालु इस दिन कलश स्थापना कर मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना का संकल्प लेंगे।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस वर्ष नवरात्रि विशेष शुभ योग और नक्षत्रों के संयोग में प्रारंभ हो रही है। नवसंवत्सर 2083 में ‘बृहस्पति’ को राजा और ‘मंगल’ को मंत्री का पद प्राप्त होगा, जो वर्ष भर उत्साह, ऊर्जा और सकारात्मक परिणामों का संकेत देता है। नवरात्रि का प्रारंभ उत्तर भाद्रपद नक्षत्र और शुक्ल योग में होने से धार्मिक दृष्टि से इसका महत्व और बढ़ गया है।
कलश स्थापना के लिए 19 मार्च को प्रतिपदा तिथि सुबह लगभग 6:51 बजे से प्रारंभ होगी। श्रद्धालु गुली काल सुबह 9:06 से 10:33 बजे, अभिजीत मुहूर्त 11:38 से 12:24 बजे तथा चर, लाभ और अमृत मुहूर्त सुबह 10:33 से दोपहर 2:57 बजे में घटस्थापना कर सकते हैं। इन शुभ मुहूर्तों में की गई पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
हालांकि इस वर्ष नवरात्रि की अवधि को लेकर कुछ भ्रम बना हुआ है। पंचांगों के अनुसार, 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 26 मार्च को समाप्त होगी। महाअष्टमी और रामनवमी दोनों तिथियां 26 मार्च को पड़ने के कारण इस बार नवरात्रि आठ दिनों की मानी जाएगी, जबकि कुछ मान्यताओं में 27 मार्च को नवमी तिथि के आधार पर उत्सव मनाया जाएगा।
27 मार्च को पुनर्वसु और पुष्य नक्षत्र के दुर्लभ संयोग में रामनवमी और महानवमी का पर्व एक साथ मनाया जाएगा। इस दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव भी धूमधाम से मनाया जाएगा। ज्योतिषीय दृष्टि से पुष्य नक्षत्र में भूमि, वाहन और आभूषण की खरीद को अत्यंत शुभ माना गया है।
इस प्रकार, इस वर्ष का नवरात्रि पर्व न केवल आध्यात्मिक साधना का अवसर है, बल्कि शुभ संयोगों के कारण जीवन में नई ऊर्जा और समृद्धि का संदेश भी लेकर आ रहा है।
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। समाचार एई समय इस जानकारी की सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी उपाय या मान्यता को अपनाने से पहले किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।)