नयी दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बात कर पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर चर्चा की। इस दौरान भारत ने स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय ऊर्जा ढांचे पर हमले स्वीकार्य नहीं हैं और समुद्री रास्तों को खुला व सुरक्षित बनाए रखना जरूरी है क्योंकि यही वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति की लाइफलाइन हैं। साथ ही, सऊदी अरब में भारतीय समुदाय के प्रति सहयोग के लिए धन्यवाद भी दिया गया।
क्षेत्र में बढ़ता तनाव
पश्चिम एशिया में अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच टकराव लगातार बढ़ रहा है। इसी बीच ईरान ने दावा किया है कि उसने दुबई में अमेरिकी सेना के दो ठिकानों पर हमला किया। ईरान की सरकारी एजेंसी फार्स समाचार एजेंसी के अनुसार इन ठिकानों पर 500 से अधिक अमेरिकी सैनिक मौजूद थे और हमले में भारी नुकसान हुआ। यह कार्रवाई ईरानी सेना इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स द्वारा मिसाइल और ड्रोन के जरिए किए जाने का दावा किया गया है, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी मानी जाती है।
अमेरिका की सैन्य तैयारी
स्थिति को देखते हुए अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागान भी सक्रिय हो गया है। CBS News की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के सैनिकों को मध्य पूर्व भेजने की तैयारी कर रहा है, जिसमें कमांड यूनिट और जमीनी बल शामिल हो सकते हैं। यह कदम संकेत देता है कि अमेरिका संभावित बड़े सैन्य घटनाक्रम के लिए खुद को तैयार कर रहा है।
संभावित आगे की स्थिति
रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका ईरान के खार्ग द्वीप पर जमीनी कार्रवाई पर विचार कर रहा है, जबकि ईरान ने वहां अतिरिक्त सैनिक तैनात कर दिए हैं और समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछानी शुरू कर दी हैं। इससे क्षेत्र में टकराव और तेज होने की आशंका है।