नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए देश के मुख्यमंत्रियों के साथ वेस्ट एशिया संकट की समीक्षा बैठक की। इस बैठक में देश की ऊर्जा सुरक्षा, पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति तथा संकट के प्रभाव को कम करने की तैयारियों पर चर्चा की गई। चुनाव वाले राज्यों के मुख्यमंत्री इस बैठक में शामिल नहीं हुए क्योंकि वहां आदर्श आचार संहिता लागू है।
प्रधानमंत्री ने पहले ही संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे पर बयान दे चुके हैं और सर्वदलीय बैठक भी बुलाई जा चुकी है। बैठक का उद्देश्य राज्यों और केंद्र के बीच समन्वय बढ़ाना और स्थानीय स्तर पर तैयारियों को मजबूत करना था।
ऊर्जा संकट के पीछे की कहानी
वेस्ट एशिया में इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष 28 फरवरी 2026 से जारी है। इस संघर्ष ने ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज मार्ग पर, जो विश्व के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस निर्यात का मार्ग है। इसके परिणामस्वरूप वैश्विक तेल कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं। फरवरी के अंत में ब्रेंट क्रूड की कीमत 72-73 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब 100 डॉलर से ऊपर जा पहुंची है। भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों पर इसका सीधा असर पड़ा है क्योंकि देश का अधिकांश तेल और एलपीजी मध्य पूर्व से आता है।
भारत की ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है। सभी रिटेल आउटलेट्स पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। घरेलू रिफाइनरियों का उत्पादन बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे रोजाना एलपीजी का उत्पादन 50,000 टन तक पहुंच गया है। यह कुल जरूरत का 60 प्रतिशत से अधिक है। रिफाइनरियां 100 प्रतिशत से अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं और लगभग 60 दिनों का क्रूड और ईंधन स्टॉक उपलब्ध है। इसके अलावा अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया से 8 लाख टन एलपीजी कार्गो सुरक्षित भारत पहुंच चुका है। मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों और गलत सूचनाओं पर ध्यान न दें।
विदेश मंत्रालय की तैयारियां
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा कि भारत सभी संबंधित देशों से लगातार संपर्क में है ताकि भारतीय जहाजों का सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित किया जा सके और ऊर्जा की आपूर्ति में कोई बाधा न आए। अब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करने वाले चार एलपीजी जहाज सुरक्षित भारत पहुंच चुके हैं। सरकार वैश्विक बाजार की स्थिति और आपूर्ति की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा स्रोत तय कर रही है, ताकि 1.4 अरब लोगों की आवश्यकताएं पूरी हो सकें।
प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यों से भी समन्वय बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर तैयारियों को मजबूत करने पर जोर दिया। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत है और स्थिति पर पूरी नजर रखी जा रही है। नागरिकों को शांति बनाए रखनी चाहिए और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करना चाहिए।