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क्या है 'एनर्जी लॉकडाउन'? सोशल मीडिया पर तेजी से हो रहा है ट्रेंड, किन चीजों पर कस सकती है लगाम?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा में संबोधन के बाद से 'एनर्जी लॉकडाउन' शब्द काफी ट्रेंड करने लगा है। पर आखिर है क्या 'एनर्जी लॉकडाउन'?

By Moumita Bhattacharya

Mar 26, 2026 22:02 IST

पश्चिम एशियाई तनाव की वजह से दुनिया के कई देशों में ऊर्जा आपालकाल की स्थिति बनती जा रही है। इस संकट की वजह से फिलीपींस ने अपने देश में राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल की घोषणा कर दी है। सोशल मीडिया पर भी चर्चाएं काफी तेज हो गयी हैं जिसमें दावा किया जा रहा है कि भारत एक बार फिर से ऐसे ही एक मोड़ पर खड़ा है।

तनाव की वजह से समुद्री मार्ग में बाधाएं आ रही हैं जिसकी वजह से देश की ऊर्जा सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। खासतौर पर 25 मार्च को सर्वदलीय बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के लोकसभा में संबोधन के बाद से 'एनर्जी लॉकडाउन' यह शब्द काफी ट्रेंड करने लगा है। पर आखिर है क्या 'एनर्जी लॉकडाउन'?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल यानी शुक्रवार (27 मार्च) को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों (जिन राज्यों में चुनाव होगा, उन्हें छोड़कर) के साथ वर्चुअली अहम बैठक करने वाले हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि केंद्र सरकार ईंधन की खपत को नियंत्रित करने की दिशा में कड़े कदम उठा सकती है। हालांकि केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने अभी तक यह आश्वासन दिया है कि देश में पर्याप्त मात्रा में पेट्रोलियम पदार्थों के स्टॉक मौजूद हैं लेकिन भविष्य की अनिश्चितता को ध्यान में रखते हुए इस रणनीति को अपनाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।

क्या है 'एनर्जी लॉकडाउन'?

सीधे व सरल शब्दों में 'एनर्जी लॉकडाउन' का मतलब ऊर्जा संसाधनों की खपत पर अंकुश लगाना है। हालांकि इन शब्दों का कोई किताबी मतलब नहीं है लेकिन 'एनर्जी लॉकडाउन' का अर्थ ईंधन और बिजली की कमी होने पर मजबूरी में सरकार द्वारा आवाजाही और व्यापारिक गतिविधियों पर पाबंदी लगाने से है। इस दौरान ईंधन के फिजुलखर्जी पर पूरी तरह से रोक लगा दी जा सकती है ताकि सिर्फ अनिवार्य सेवाओं के लिए ऊर्जा बचायी जा सके।

किन चीजों पर लग सकती है लगाम?

अगर देश में 'एनर्जी लॉकडाउन' होता है तो सबसे पहले परिवहन व्यवस्था पर लगाम कसी जा सकती है। ईंधन यानी पेट्रोल-डीजल से लेकर LPG तक की बिक्री को सीमित किया जा सकता है। ईंधन की बचत के लिए देश के बड़े-बड़े शहरों में कार-फ्री संडे या फिर ऑड-इवन जैसे नियमों को लागू किया जा सकता है।

लंबी दूरी की यात्राएं महंगी हो सकती हैं, सड़कों पर परिवहन के संसाधन को कम किया जा सकता है। यानी हर वह उपाय जो ईंधन की खपत को कम कर सकता है उसे लागू किया जा सकता है। अगर 'एनर्जी लॉकडाउन' होता है तो बड़े आयोजन जैसे आईपीएल से लेकर चुनावी रैलियां और जुलूस आदि को निकालने पर भी पाबंदी लग सकती है क्योंकि जितनी भीड़, उतनी ज्यादा गाड़ियों में ईंधन व बिजली की खपत।

क्यों ट्रेंड कर रहा 'एनर्जी लॉकडाउन'?

'एनर्जी लॉकडाउन' शब्द कोविड काल से जोड़कर बनाया गया है। इसलिए पश्चिम एशियाई देशों में तनाव के बढ़ने की वजह से सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है। अगर 'एनर्जी लॉकडाउन' लगता है तो संभावना जतायी जा रही है कि कोरोना काल की तरह फिर से निजी व सार्वजनिक क्षेत्रों के कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम ऑफ होम के निर्देश दिए जा सकते हैं। इसका उद्देश्य ऑफिसों में जाने वाले लोगों द्वारा खर्च किए जाने वाले पेट्रोल और डीजल की खपत को कम करना है। इसी तरह से स्कूलों के लिए ऑनलाइन मोड में शिक्षा पद्धति को फिर से वापस लाया जा सकता है।

हालांकि संभावना है कि 'एनर्जी लॉकडाउन' का मतलब कामकाज को पूरी तरह से बंद कर देना नहीं है बल्कि इस दौरान भी कोरोना काल की तरह ही आपातकालीन सेवाओं, आपातकालीन वाहनों, फायर ब्रिगेड, अस्पताल, पुलिस आदि का काम पूरी तरह से चलता रहेगा और इन सेवाओं को बिना किसी रुकावट के ही ईंधन की आपूर्ति की जाती रहेगी। संभव है कि परिवहन के सार्वजनिक वाहन, मेट्रो रेल, लोकल ट्रेन आदि की संख्या को कम किया जाए लेकिन इनकी सेवाएं पहले की तरह ही बनी रहेंगी।

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